नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने हिंसा प्रभावित जिरीबाम के साथ-साथ मणिपुर के छह पुलिस थाना क्षेत्रों में आर्म फोर्स स्पेशल पावर एक्ट को फिर से लागू कर दिया है. इस संबंध में गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना भी जारी है, जिसमें कहा गया है कि यह निर्णय वहां चल रही जातीय हिंसा के कारण लगातार अस्थिर स्थिति को देखते हुए लिया गया है।
जिन पुलिस थाना क्षेत्रों में फिर से लागू किया गया है, उनमें इंफाल पश्चिम जिले के सेकमाई और लामसांग, इंफाल पूर्व जिले के लामलाई, जिरीबाम जिले के जिरीबाम, कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग और बिष्णुपुर जिले के मोइरांग शामिल हैं।
सुरक्षा बलों और उग्रवादियों की मुठभेड़
इससे पहले मणिपुर के जिरीबाम जिले में सोमवार को वर्दीधारी और अत्याधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों ने एक पुलिस थाने और उसके निकटवर्ती सीआरपीएफ शिविर पर अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी, जिस के बाद सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में ग्यारह संदिग्ध उग्रवादी मारे गए. घटना के एक दिन बाद इसी जिले से सशस्त्र उग्रवादियों ने महिलाओं और बच्चों सहित छह नागरिकों का अपहरण कर लिया था.
क्यों लगाया जाता है एएफपीएसए
आर्म फोर्स के संचालन को सुविधाजनक बनाने के तहत किसी क्षेत्र या जिले को अशांत अधिसूचित किया जाता है. एएफपीएसए अशांत क्षेत्रों में काम करने वाले सशस्त्र बलों को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए तलाशी लेने, गिरफ्तार करने और गोली चलाने के व्यापक अधिकार देता है।
गौरतलब है कि यह आदेश मणिपुर सरकार द्वारा 1 अक्टूबर को राज्य में एएफपीएसए लागू करने के बाद आया है. मणिपुर सरकार के आदेश इंफाल, लाम्फाल, सिटी, सिंगजामेई, सेकमाई, लामसांग, पटसोई, वांगोई, पोरोमपत, हेइंगंग, लामलाई, इरिलबुंग, लेइमाखोंग, थौबल, बिष्णुपुर, नाम्बोल, मोइरंग, काकचिंग और जिरीबाम को एएफपीएसए से बाहर रखा गया था।
मैतेई और कुकी समुदाय के बीच हुए जातीय हिंसा
पिछले साल मई से इंफाल घाटी स्थित मैतेईस और कुकी समुदाय के बीच हुए जातीय हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. जातीय रूप से विविधतापूर्ण जिरीबाम, इन संघर्षों से काफी हद तक अछूता रहा है, लेकिन इस साल जून में एक खेत में किसान का शव पाए जाने के बाद यहा भी हिंसा हो रही है।
