ग्वालियर। जब हम साधना करते हैं तो ईश्वर के करीब होते चले जाते हैं और जब ऐसा होता है तो हमारा स्वभाव बदल जाता है व प्रभाव बढने लगता है। साधना से स्वभाव सरल होता चला जाता है। यह बात मां कनकेश्वरी देवी ने रामलीला मैदान मुरार में आयोजित श्रीमद्देवी कथा में कही।
कनकेश्वरी देवी ने कहा कि कर्तव्य से विमुख होकर यदि साधना करोगो तो वह फलीभूत नहीं होगी, इसलिए सांसारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए साधना पथ पर आगे बढ़ें। माता-पिता, परिवार और समाज के प्रति कर्तव्य तो निभाएं, लेकिन ममत्व न फंसे। ममता से बचने के लिए वैरागियों का सत्संग करें।
उन्होंने कहा कि जो मुत है वही गुरु है और जो गुरु है वो मुत है। सद्गुरु अपनी इच्छापूर्ति के लिए नहीं बल्कि लोगों को बंधनों से मुत करने के लिए आते हैं। वो हमें इस संसाररूपी सागर में डूबने से बचाने के लिए आते हैं। ज्ञानी का ज्ञान गुरुकृपा से सार्थक हो जाता है। संसार में कुछ नहीं यह तो सब जानते हैं, लेकिन अध्यात्म में या है, यह जानने के लिए गुरु के पास जाना पड़ता है।
साधना से मनुष्य के स्वभाव में बदलाव आता है: कनकेश्वरी देवी
