जबलपुर । नगर निगम के कर्मचारियों की पदोन्नति के मामले में शुक्रवार को फिर जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस मामले में नगर निगम जबलपुर में कार्यरत कालू राम सोलंकी व संतोष कुमार गौर ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि हाईकोर्ट ने मुख्य स्वच्छता निरीक्षक के रिक्त पदों लिए 45 दिनों में विभागीय पदोन्नति समिति का गठन कर वरिष्ठ सूची के आधार पर पदोन्नति प्रदान करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ.
वहीं इस मामले में लगी इंटरवीनर पिटीशन (हस्तक्षेप याचिका) में बताया गया कि नगर निगम के इन कर्मचारियों को पूर्व में नियम विरुद्ध तरीके से पदोन्नति का लाभ दिया गया.
गलत तरीके से मिला प्रमोशन
इस मामले की सुनवाई में इंटरवीनर पोला राव व अन्य ने कोर्ट में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान अपने पक्ष रखे. जस्टिस एके सिंह की एकलपीठ को बताया गया कि निगम कर्मचारी कालूराम और संतोष कुमार ने खुद को वरिष्ठता सूची में शीर्ष स्थान पर दिखाते हुए प्रमोशन के लिए पिटीशन लगाई थी, जबकि वे जूनियर स्वच्छता निरीक्षक थे. नगर निगम अधिनियम के अनुसार ऐसा कोई भी नियम या प्रावधान नहीं है कि जूनियर स्वच्छता निरीक्षक को स्वच्छता निरीक्षक के पद पर प्रमोट कर दिया जाए.
प्रमोशन पर रोक बरकरार
इंटरवीनर ने नगर निगम प्रमोशन के लिए डीपीसी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे पूर्व में हाईकोर्ट की दूसरी एकलपीठ ने स्वीकार कर लिया था. जस्टिस ए.के. सिंह की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद प्रमोशन प्रक्रिया पर लगी रोक को बरकरार रखते हुए दोनों पक्षों को फिर सुनने का आदेश दिया है. इंटरवीनर पोला राव की ओर से एडवोकेट कबीर पॉल ने पैरवी की।
कर्मचारियों को नियम विरुद्ध प्रमोशन देने का मामला, हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं.
