सदस्यता रद्द करने को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा स्पीकर को दिया था आवेदन
सागर । मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतीं विधायक निर्मला सप्रे को इंदौर हाई कोर्ट से राहत दे दी है. लोकसभा चुनाव के वक्त उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था. उनकी सदस्यता को लेकर मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की तरफ से लगाई गई याचिका इंदौर खंडपीठ ने खारिज कर दी है।
विधानसभा स्पीकर द्वारा फैसला नहीं लिए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने लगाई थी इंदौर खंडपीठ में याचिका
इंदौर हाई कोर्ट के जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने आदेश पारित करते हुए कहा कि उमंग सिंघार जबलपुर हाइकोर्ट के समक्ष याचिका लगाने के लिए स्वतंत्र हैं. गौरतलब है कि कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत कर बिना इस्तीफा दिए बीजेपी में शामिल हुई निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा स्पीकर के समक्ष सदस्यता रद्द करने आवेदन किया था. लेकिन स्पीकर द्वारा फैसला नहीं लिए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने इंदौर खंडपीठ में याचिका लगाई थी.
इंदौर हाईकोर्ट ने ये बताई याचिका खारिज करने की वजह
उमंग सिंघार की याचिका खारिज करते हुए जस्टिस प्रणय वर्मा ने वजह भी बताई है. उन्होंने कहा कि ये मामला इंदौर खंडपीठ के क्षेत्राधिकार में विचारणीय ना होने के कारण ऐसा फैसला सुनाया गया है. हालांकि फैसले में उन्होंने याचिकाकर्ता को फिर से जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होने की बात कही है. अब फैसला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को करना है कि वह जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका का लगाते हैं या नहीं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों इस मामले पर सुनवाई के बाद इंदौर खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. दरअसल नेता प्रतिपक्ष ने विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता निरस्त करने का मांग को लेकर रिट पिटीशन दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि निर्मला सप्रे 2023 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीती थीं, लेकिन विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए बिना ही वह बीजेपी में शामिल हो गईं.
याचिका में उमंग सिंघार ने मांग की थी कि जब निर्मला सप्रे ने दल बदल किया है, तो उनकी सदस्यता रद्द होनी चाहिए. कांग्रेस ने संविधान की 10वीं अनुसूची के अनुसार सदस्यता रद्द की जाने की मांग की थी. इंदौर खंडपीठ में नेता प्रतिपक्ष की तरफ से एडवोकेट विभोर खंडेलवाल और विधायक निर्मला सप्रे की तरफ से मनीष नायर ने अपना-अपना पक्ष रखा.
भाजपा के कार्यक्रमों में होती है शामिल
निर्मला सप्रे सागर जिले की आठ विधानसभा में से अकेली कांग्रेस उम्मीदवार थी, जिन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता. बाकी 7 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी. लेकिन सागर लोकसभा सीट के चुनाव के ठीक 1 दिन पहले राहतगढ़ में एक सभा की दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष निर्मला सप्रे बीजेपी में शामिल हो गई थीं. लेकिन निर्मला सप्रे ने इस्तीफा नहीं दिया और खुलकर भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होने लगीं. यहां तक कि भाजपा द्वारा जारी एक सूची में उन्हें संगठन स्तर पर पद भी दिया गया. बाद में भूल चूक कहकर फैसला वापस ले लिया था. इस मामले में विधानसभा स्पीकर को 90 दिन के भीतर फैसला लेना होता है. लेकिन नेता प्रतिपक्ष के आवेदन पर स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर ने आज तक कोई फैसला नहीं लिया है।
