चंडीगढ़। हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. एक ईमानदार, तेजतर्रार और जिम्मेदार अधिकारी का इस तरह का कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है. अब ये मामला सियासी हो चला है. विपक्ष ने सवालों की बौछार कर दी है. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है.
राहुल गांधी का भाजपा आरएसएस पर निशाना: नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा ष्हरियाणा के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार जी की आत्महत्या उस गहराते सामाजिक जहर का प्रतीक है, जो जाति के नाम पर इंसानियत को कुचल रहा है। जब एक प्च्ै अधिकारी को उसकी जाति के कारण अपमान और अत्याचार सहने पड़ें – तो सोचिए, आम दलित नागरिक किन हालात में जी रहा होगा। रायबरेली में हरिओम वाल्मीकि की हत्या, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का अपमान और अब पूरन जी की मृत्यु – ये घटनाएँ बताती हैं कि वंचित वर्ग के खिलाफ अन्याय अपनी चरम सीमा पर है। भाजपा आरएसएस की नफरत और मनुवादी सोच ने समाज को विष से भर दिया है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम आज न्याय की उम्मीद खोते जा रहे हैं। ये संघर्ष केवल पूरन जी का नहीं – हर उस भारतीय का है जो संविधान, समानता और न्याय में विश्वास रखता है।ष्
ये संविधान और लोकतंत्र के लिए घातक- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा भाजपा का मनुवादी तंत्र इस देश के एससी,एसटी ओबीसी और कमजोर वर्गों के लिए एक अभिशाप बन चुका है। हरियाणा के वरिष्ठ दलित आईपीएस अधिकारी, एडीजीपी श्री वाई. पूरन कुमार की मजबूरन आत्महत्या की खबर न केवल स्तब्ध करने वाली है, बल्कि सामाजिक अन्याय, अमानवीयता और संवेदनहीनता का भयावह प्रमाण है। परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। पिछले 11 वर्षों में इस देश में भाजपा ने मनुवादी मानसिकता इतनी गहरी कर दी है कि एडीजीपी रैंक के दलित अधिकारी को भी न्याय और सुनवाई नहीं मिलती है। जब सुप्रीम कोर्ट में सरेआम माननीय मुख्य न्यायाधीश पर हमला हो सकता है और उसे भाजपा का म्बवेलेजमउ जातिवाद और धर्म का हवाला देकर कममिदक कर सकता है, तो हमें ये समझ लेना चाहिए कि “सबका साथ” का नारा एक भद्दा मजाक था। हजारों वर्षों से मनुवादी मानसिकता की शोषण करने की आदत इतनी जल्दी तो नहीं बदल सकती। तभी हरिओम वाल्मिकी जैसे निहत्थे दलित की मॉब लिंचिंग से नृशंस हत्या हो जाती है और प्रधानमंत्री मोदी जी निंदा के दो शब्द भी नहीं बोलते! यह सिर्फ कुछ व्यक्तियों की त्रासदी नहीं, यह उस भाजपा और संघ द्वारा पोषित अन्यायपूर्ण व्यवस्था का आईना है, जो दलित, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यक वर्गों के आत्मसम्मान को बार-बार कुचलती रही है। ये संविधान और लोकतंत्र के लिए घातक है।
न्याय सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी- भूपेंद्र हुड्डा: हरियाणा नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा ष्हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का मामला बेहद दुःखद है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि किसी दोषी को छोड़ा न जाए और किसी निर्दोष पर आंच न आए। इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और परिवारजनों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार पर उठाए सवाल: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने भी सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा एडीजीपी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या दुखद और स्तब्ध करने वाली है। क्या हरियाणा सरकार का सिस्टम इतना पक्षपातपूर्ण है कि एक दलित प्च्ै अधिकारी को भी न्याय नहीं मिलता? अब समय है कि चंडीगढ़ प्रशासन व गृह मंत्रालय उनकी आईएएस पत्नी की बात सुनें और न्याय दें।
रणदीप सुरजेवाला का हरियाणा सरकार पर निशाना: कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा ष्हरियाणा के वरिष्ठ दलित आईपीएस अधिकारी, एडीजीपी श्री याई. पूरन कुमार की मजबूरन आत्महत्या का मामला स्तब्ध करने वाला भी है, दुखदायी भी और हृदय विदारक भी। परिवार को मेरी संवेदनाएं। क्या हरियाणा की भाजपा सरकार का सिस्टम इतना कमजोर या पूर्वाग्रह से ग्रस्त है कि एक एडीजीपी रैंक के दलित प्च्ै अधिकारी को भी न सुनवाई मिलती और न न्याय? यह कड़वा सत्य है कि पिछले ग्यारह वर्षों में विशेषतः दलित अधिकारियों और कर्मियों को भेदभावपूर्ण तरीके से दरकिनार भी किया गया है और अपमानित भी। आज भी याद है कि भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री ने किस प्रकार से एक दलित महिला प्च्ै अधिकारी को सार्वजनिक तरीके से अपमानित किया था। अंबाला जिले में एक दलित महिला भाजपा विधायक को किस प्रकार से भाजपा के लोगों ने धमकी दी थी और उसे सुरक्षा की गुहार लगानी पड़ी थी, या फिर भाजपा के एक दलित विधायक को हिसार में स्वतंत्रता दिवस पर मंच पर न बैठने दे, अपमानित किया गया था। हालांकि ब्ड श्रीमान नायब सैनी चुप्पी साधें हैं, उम्मीद है कि चण्डीगढ़ प्रशासन व देश का गृह मंत्रालय एडीजीपी वाई. पूरन कुमार की आईएएस अधिकारी पत्नी की बात सुनेगा और न्याय देगा।
कुमारी सैलजा हरियाणा सरकार पर बरसीं: हरियाणा में एक दलित आईपीएस अधिकारी द्वारा आत्महत्या किया जाना अत्यंत दुखद, चिंताजनक और गहरी पीड़ा का विषय है। यह केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि उस संस्थागत असंवेदनशीलता और जातिगत भेदभाव की भयावह झलक है जो भाजपा शासन में लगातार गहराती जा रही है। वर्ष 2020 से लगातार जातिसूचक अपमान, मानसिक उत्पीड़न और अन्याय झेलते हुए अंततः एक अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी कृ यह भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता और सामाजिक न्याय के प्रति उदासीनता को उजागर करता है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच अनिवार्य है ताकि दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
कुमारी सैलजा का सरकार पर निशाना
हरियाणा के सीएम ने दिया कड़ी कार्रवाई का आश्वासन: हालांकि हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है. उन्होंने लिखा ष्दिवंगत आईपीएस अधिकारी श्री वाई पूरन कुमार जी के असामयिक निधन के पश्चात आज उनके आवास पर जाकर शोक प्रकट किया। परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। ईश्वर से प्रार्थना है कि इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों को शक्ति दें। ॐ शांति।ष्
क्या है पूरा मामला: आईपीएस वाई पूरन कुमार चंडीगढ़ के सेक्टर 11 में कोठी नंबर 116 में रहते थे. मंगलवार 7 अक्टूबर 2025 को वो और उनकी छोटी बेटी घर पर थे. सुबह दोनों ग्राउंड फ्लोर पर थे, लेकिन पूरन बेसमेंट में चले गए. वहां साउंडप्रूफ मूवी थिएटर में सोफे पर बैठकर उन्होंने आत्महत्या कर ली. बेटी को पिता का शव और खून दिखा, तो उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी. चंडीगढ़ पुलिस ने बताया कि मौके से एक पिस्टल, वसीयत और फाइनल नोट मिला. सुसाइड नोट में खुलासे के बाद हरियाणा की सियासत और अफरशाही में हलचल मची हैै।
आईपीएस वाई पूरन आत्महत्या पर मचा सियासी कोहराम, राहुल गांधी का भाजपा आरएसएस पर निशाना
