भोपाल । मुल्क की मौजूदा सेहत हाल बहुत चिंताजनक है. अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि खास तबके को संरक्षण और दूसरे तबके को कानूनी तौर पर बेबस, समाजी तौर पर अलाहिदा और बेइज्जत किया जा रहा है. एक मजहब को रुसवा मरहम बनाने के लिए बुलडोजर एक्शन और मॉब लिंचिंग समेत अन्य कोशिशें की जा रही हैं. उनके मजहब शिनाख्त और वजूद को गैर-जरूरी बताया जा रहा है
सरकारी सरपरस्ती में जुल्म और सितम की वजह से हालात इस जगह पर पहुंच गए हैं कि आज मुसलमान राह चलते अपने को गैर-महफूज एहसास करता है. उन्हें कदम-कदम पर पर नफरत और हिकारत का सामना करना पड़ता है. ये कहना है भोपाल में आयोजित जमीयत उलेमा ए हिंद के गवर्निंग कमेटी की बैठक में शामिल होने आए मौलाना महमूद मदनी का.
देश के लिए खतरा पैदा हो सकता है
मौलाना मदनी ने मुसलमानों को टारगेट करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसे शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए गढ़े गए हैं. इस्लाम में जिहाद का मतलब अन्याय और जुल्म के खिलाफ संघर्ष है. जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा. मौलाना ने कहा कि अदालतों को निष्पक्ष रहना चाहिए. अभी देश की बड़ी आबादी खामोश है. यदि यह तबका नफरत फैलाने वालों की ओर गया तो देश के लिए खतरा पैदा हो सकता है. देश में मुगलों के नाम पर मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश हो रही है।
खास धर्म को धर्म परिवर्तन की खुली छूट
मौलाना मदनी ने कहा कि देश के संविधान में हमें मजहब पर चलने और उसके तबलीग की इजाजत दी गई है. लेकिन कन्वर्जन लॉ में तरमीन के जरिए बुनियादी हक को खत्म किया जा रहा है. इस कानून को इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है कि मजहब की तबलीग का अमल खौफ या सजा प्रतीक बन जाए. दूसरी तरफ घर वापसी के नाम पर किसी खास धर्म में धर्म परिवर्तन कराने वालों को खुली छूट मिली हुई है. उन पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता और न ही कानूनी कार्रवाई होती है. मुसलमानों को टारगेट करने के साथ मदनी ने वक्फ संपतियों और हलाला समेत अन्य मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।
