रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में जमीन से निकाला जा रहा पानी पीने के मानकों पर खरा नहीं है
नई दिल्ली। दूषित पानी इस समय देश में गंभीर मुद्दा बना हुआ है. राजधानी दिल्ली में पीने के पानी की शुद्धता को लेकर एक भयावह सच्चाई सामने आई है. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट, जिसे 7 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में पेश किया गया, इस रिपोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड के दावों और आपूर्ति किए जा रहे पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है। रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ बताते हुए सरकार से तत्काल सुधार की मांग की है.
आधे से ज्यादा भूजल पीने योग्य नहीं
सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में जमीन से निकाला जा रहा पानी पीने के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है. जांच के दौरान लिए गए 16,234 भूजल नमूनों में से 8,933 नमूने (लगभग 55 प्रतिशत) फेल पाए गए. ऑडिट अवधि (वर्ष 2017 से 2022) के दौरान स्थिति इतनी चिंताजनक रही कि कुछ वर्षों में नमूने फेल होने की दर 63 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। ऑडिट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उन क्षेत्रों से भूजल की आपूर्ति करना जहाँ के नमूने असुरक्षित पाए गए हैं, सीधे तौर पर जनता की जान को जोखिम में डालना है.
बिना उपचार के सप्लाई हो रहा है पानीः एक बड़ा खतरा
रिपोर्ट का सबसे परेशान करने वाला हिस्सा वह है जिसमें बताया गया है कि ऑडिट के पांच वर्षों के दौरान प्रतिदिन 80 से 90 मिलियन गैलन कच्चा और बिना शोधित पानी सीधे बोरवेल और रेनी वेल से जलाशयों और उपभोक्ताओं तक पहुंचाया गया. पानी को बिना फिल्टर या साफ किए सीधे जनता तक पहुँचाना जलजनित बीमारियों को खुला निमंत्रण देने जैसा है.
कागजी साबित हो रही पानी की शुद्धता जांच
दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाएं संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रही हैं. सीएजी ने पाया कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के अनुसार पानी की जांच 43 मापदंडों पर होनी चाहिए, लेकिन दिल्ली की लैब में केवल 12 मापदंडों पर ही जांच सिमट कर रह गई. घातक रसायनों की अनदेखी भी उजागर हुआ है. आर्सेनिक, लेड (सीसा), रेडियोधर्मी तत्व और जहरीले जैविक मापदंडों की कोई जांच नहीं की जा रही है. निजी तौर पर संचालित प्लांटों में प्रतिबंधित और कैंसरकारी श्पॉलीइलेक्ट्रोलाइट्सश् का इस्तेमाल अभी भी जारी है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है. वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और जलाशयों में श्फ्लो मीटरश् न होने के कारण बोर्ड को यह तक पता नहीं है कि कितना पानी उपचारित किया गया और कितनी मात्रा में शुद्ध पानी की आपूर्ति हुई।
पानी की भारी किल्लत और प्रशासनिक विफलता
दिल्ली में पानी की कुल आवश्यकता लगभग 1,680 मिलियन यूनिट आंकी गई है, लेकिन वर्तमान में 25 प्रतिशत पानी की भारी किल्लत बनी हुई है. स्टाफ और आधुनिक उपकरणों की कमी ने दिल्ली जल बोर्ड की कार्यक्षमता को पूरी तरह पंगु बना दिया है. ऑडिट रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद गैर सरकारी संस्था जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया के प्रतिनिधियों, मित्रा रंजन और ऋतु प्रिया ने दिल्ली सरकार और जल बोर्ड की जवाबदेही तय करने की पुरजोर मांग की है. संस्था ने मांग की है कि वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में कच्चे पानी की सप्लाई पर रोक लगे, पीने के पानी की गुणवत्ता 100 फीसद ठप्ै मानकों के अनुरूप सुनिश्चित हो. जल बोर्ड की प्रयोगशालाओं में तत्काल योग्य स्टाफ की भर्ती हो और वहां सभी 43 मापदंडों की जांच के लिए मशीनें लगाई जाएं. पानी की गुणवत्ता की जांच हर 15 दिन में अनिवार्य रूप से की जाए. पानी की गुणवत्ता का पूरा डेटा सार्वजनिक डोमेन में रखा जाए ताकि जनता जान सके कि वे क्या पी रहे हैं. इस दीर्घकालिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
विधानसभा में रखी गयी सीएजी रिपोर्ट की मुख्य बातें
यह रिपोर्ट मुख्य रूप से वर्ष 2017 से 2022 के बीच दिल्ली जल बोर्ड के प्रदर्शन का विश्लेषण करती है.
ऑडिट में पाया गया कि 16,234 भूजल नमूनों में से 55ः नमूने (8,933) पीने योग्य नहीं थे।लगभग 80-90 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) कच्चा और बिना ट्रीट किया हुआ पानी सीधे उपभोक्ताओं को सप्लाई किया गया.मार्च 2022 तक दिल्ली जल बोर्ड पर बकाया ऋण और ब्याज की राशि बढ़कर 66,595 करोड़ हो गई थी.वर्ष 2021-22 के दौरान, उत्पादित कुल पानी में से केवल 40 फीसद (371 एमजीडी) का ही बिल जनरेट किया गया, जिसका अर्थ है कि 60 फीसद पानी बिना राजस्व के बर्बाद या चोरी हो गया. जल बोर्ड की प्रयोगशालाओं में स्टाफ और आधुनिक उपकरणों की भारी कमी पाई गई, जिसके कारण ठप्ै मानकों के अनुसार पानी की पूरी जांच नहीं हो पा रही थी।
इनका है कहना
यह रिपोर्ट आप सरकार के कार्यकाल की है. दूषित पानी की आपूर्ति बड़ा मुद्दा है. केजरीवाल सरकार ने अपनी कमी छिपाने के लिए सीएजी की रिपोर्ट को टेबल नहीं किया था. हमारी सरकार खराब सिस्टम को दुरुस्त करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे।
-प्रवेश वर्मा, जल मंत्री दिल्ली सरकार
दिल्ली में जहरीला हो रहा भूजलः सीएजी रिपोर्ट में खुलासा, 55 फीसद सैंपल फेल
