शिवराज दिल्ली जाकर शिकायत करते हैं, मोहन का मंत्रियों पर कंट्रोल नहीं, जीतू पटवारी ने लगाए गंभीर आरोप

भोपाल । कैबिनेट की बैठक में मंत्रियों द्वारा जीएसटी कलेक्शन पर वित्त मंत्री को घेरने के मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि मैं बार-बार कहता हूं कि मंत्रियों के आपसी झगड़े हैं. मंत्रीमंडल में मंत्रियों का एक समूह बना हुआ है, जिसका नेतृत्व शिवराज सिंह चौहान कर रहे हैं. इस समूह का काम है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को अस्थिर करना. इसके लिए वे दिल्ली में संघ में रोज शिकायतें करते हैं, बीजेपी के अंदर बुराई करते हैं. दरअसल, प्रदेश में जीएसटी कलेक्शन घटने को लेकर सीनियर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने सवाल खड़े किए थे।
जीतू पटवारी बोले हम इससे खुश नहीं
कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के बाद मीडिया से चर्चा के दौरान जीतू पटवारी ने कहा,हमारा दायित्व यह नहीं कहता कि यह आपस में लड़ें तो हम खुश हों. हमारा दायित्व है कि मध्यप्रदेश समृद्ध बने और हम उनका सहयोग करें, जीतू पटवारी ने कहा, मुख्यमंत्री का नियंत्रण मंत्रियों पर ही नहीं है. मोहन यादव का नियंत्रण प्रदेश के प्रशासनिक अमले पर भी नहीं है. जिस तरह से मंत्रियों का आपसी मतभेद चल रहा है, वह मध्यप्रदेश के भविष्य को बिगाड़ रहा है।
कर्ज पर कमीशन ले रही सरकार: पटवारी
कांग्रेस प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा, जिस तरह से वित्त मंत्री द्वारा लगातार कर्ज किया जा रहा है और फिर उस कर्ज में से 50 फीसदी कमीशन लिया जा रहा है. यानी पहले रोज दो सौ करोड़ रुपए का कर्ज लो और फिर 100 करोड़ रुपए चोरी कर लो. इस तरह का मध्यप्रदेश की सरकार का व्यवहार हो गया है।
सवाल उठाता हूं तो सरकार हो जाती है नाराज
जीतू पटवारी ने कहा कि जब सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर मैं सवाल उठाता हूं तो सरकार नाराज हो जाती है. राजनीतिक अय्याशी के शब्द पर मुख्यमंत्री नाराज हो जाते हैं. आखिर राजनीतिक अय्याशी क्या होती है? सरकारी खर्च पर महिलाओं को एकट्ठा करना और कर्ज लेना, बड़ा स्टेज सजाना और कर्ज लेना, जिस माइक से बोल रहे हैं वह माइक भी कर्ज के पैसे का है और फिर भाषण में कहते हैं कि करो स्वागत।
पटवारी ने आगे कहा,यह बताता है कि सरकार मध्यप्रदेश को गंभीर चुनौती और संकट में डाल रही है, मध्यप्रदेश की जनता ने बीजेपी को इसलिए इतना बड़ा जनादेश इसलिए नहीं दिया कि यह प्रदेश के भविष्य को दुख और दर्द दें और आने वाले भविष्य को बिगाड़ें।

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