Warning: Undefined array key 0 in /home/webhutor/nandkesari.com/wp-content/plugins/contact-form-7/includes/file.php on line 268
तानसेन संगीत समारोह: बटेश्वर मंदिरों की दिव्यता की लालिमा में स्वरकृसाज की अनुगूंज - Nand Kesari || Top News || Latest News

तानसेन संगीत समारोह: बटेश्वर मंदिरों की दिव्यता की लालिमा में स्वरकृसाज की अनुगूंज

ग्वालियर। सर्द सुबह में प्राकृतिक वातावरण के बीच बटेश्वर मंदिर समूह परिसर की दिव्यता की लालिमा के बीच तानसेन संगीत समारोह के 100वें उत्सव की विशेष संगीत सभा सजी। इस सभा में गान मनीषियों ने स्वरकृसाज की अनुगूंज कर वातावरण में मधुरता घोल दी।
मनोरम दृश्यों के बीच संगीत के स्वरकृसाजों को सुनना रसिक श्रोताओं के लिए अनूठा अवसर था। बटेश्वर मंदिर की अलौकिक आभा में सर्वप्रथम मुरैना के मोहित खां ने स्वर छेड़े। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के लिए राग मियां की तोड़ी को चुना। इसमें उन्होंने विलंबित लय की रचना और मध्य लय की रचना प्रस्तुत की। मोहित खां ने अपनी प्रस्तुति का समापन राग मिश्रित पहाड़ी में ठुमरी गाकर किया। आपके साथ तबले पर शाहरुख खां, हारमोनियम पर सुश्री मीरा वैष्णव और सारंगी पर सलमान खां ने संगत दी।परिंदों की चहचहाहट से परिसर खुशनुमा हो चुका था, तो वहीं संगीत के स्वरकृसाज की अनुगूंज इस वातावरण में मधुरता घोल रही थी। अब समय आ चुका था अध्यात्म की यात्रा पर जाने का। इस यात्रा पर के जाने के लिए मंच पर नमूदार हुईं उदयपुर की सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री महालक्ष्मी शिनाय। उन्होंने अपनी प्रस्तुति किए राग नट भैरव का चुनाव किया। इसमें छोटा और बड़ा खयाल प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद राग अहीर भैरव में बंदिश पेश की। अंत में कोंकणी का पारम्परिक भजन नारी नयन चकोरा…. से प्रस्तुति को विराम दिया। आपके साथ तबले पर हिमांशु महंत, हारमोनियम पर नवनीत कौशल एवं सारंगी पर आबिद हुसैन ने संगत दी।
अगली प्रस्तुति भोपाल के सुप्रसिद्ध सरोद वादक आमिर खां की थी। सुप्रसिद्ध संगीत परिवार से सम्बन्धित आमिर खां के दादा एवं पद्मश्री उस्ताद अब्दुल लतीफ खां के साथ संगीत की धारा बहती रही है। आमिर खां ने अपनी प्रस्तुति के लिए राग बैरागी को चुना। कर्णप्रिय और भक्ति रस से भरपूर इस राग को सरोद पर सुनना रसिक श्रोताओं के लिए अनुपम अनुभव रहा। तारों पर मझा हुई उंगलियों से सरोद के स्वरों ने संपूर्ण परिसर को सुरीला बना दिया। उनके साथ तबले पर भोपाल के अशेष उपाध्याय ने संगत दी। इस विशेष सभा की अंतिम प्रस्तुति विदुषी सुनंदा शर्मा के गायन की रही। आप बनारस घराने की प्रख्यात गायिका डॉ. विदुषी गिरीजा देवी की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए, युवा पीढ़ी में एक प्रमुख शास्त्रीय गायिका के रूप में उभरी हैं। सुश्री सुनंदा शर्मा ने अपनी प्रस्तुति के लिए राग विलासखानी तोड़ी को चुना, जिसे स्वर सम्राट तानसेन के पुत्र विलास खान ने बनाया था। इसमें उन्होंने बंदिश कब घर आवेंगे…. सुरीले और प्रभावी ढंग से गाया। गायन में आगे उन्होंने राग बहार में बनारस घराने का टप्पा सुनाया, जिसके बोल थे गुलशन में बुलबुल चहकी….। उनके साथ सारंगी पर मुन्ने खां, तबले पर अभिषेक मिश्रा एवं हारमोनियम पर विवेक जैन ने संगत की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *