लालू यादव ने रेलवे टेंडर घोटाले मामले में ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में दी चुनौती

नई दिल्ली । रेलवे टेंडर घोटाला मामले के आरोपी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोप तय करने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच 5 जनवरी को इस मामले पर सुनवाई करेगी।
13 अक्टूबर को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिया था. कोर्ट ने तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से पेश वकील मनिंदर सिंह ने कहा था कि अभियोजन चलाने के लिए कोई साक्ष्य नहीं है, ऐसे में अनुमति की वैधता सवालों के घेरे में है. उन्होंने कहा था कि पहले सीबीआई ने कहा कि लालू यादव के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए अनुमति की कोई जरुरत नहीं है. उसके बाद सीबीआई ने कहा कि उन्हें अभियोजन चलाने के लिए अनुमति मिल गई है. ये कानून सम्मत नहीं है।
लालू यादव की दलीलों का विरोध करते हुए सीबीआई ने कहा था कि आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पुख्ता सबूत हैं. 28 जनवरी 2019 को ट्रायल कोर्ट ने ईडी की ओर से दर्ज केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को नियमित जमानत दी थी. कोर्ट ने एक-एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी. 19 जनवरी 2019 को कोर्ट ने सीबीआई की ओर से दर्ज केस में लालू यादव को नियमित जमानत दी थी।
कोर्ट ने 17 सितंबर 2018 को ईडी की ओर से दायर चार्जशीट पर संज्ञान लिया था. इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी समेत 16 लोगों को आरोपी बनाया गया है. ईडी ने जिन्हें आरोपी बनाया है उनमें लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलान और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राईवेट लिमिटेड शामिल हैं।
लालू यादव पर आरोप है कि उन्होंने रेलमंत्री रहते हुए रेलवे के दो होटलों को आईआरसीटीसी को ट्रांसफर किया और होटलों की देखभाल के लिए टेंडर जारी किए थे. रांची और पुरी के दो होटलों का आवंटन कोचर बंधु की कंपनी सुजाता होटल को ट्रांसफर कर दिया था।
साथ ही किसी भी गिरफ्तारी में पुलिस द्वारा लिखित में उस व्यक्ति को तुरंत नोटिस देना होता है, जिसमें बताया जाता है कि उसकी गिरफ्तारी किस अपराध में की गई है. और यदि केस 7 साल के नीचे का है तो नोटिस देना मेंडेटरी है. अनिल मिश्रा के केस में हाईकोर्ट के इस नियम का उल्लंघन किया गया है।

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