मध्यप्रदेश जनगणना: डिजिटल होगी प्रोसेस, जानकारी देने से किया इंकार तो होगी कार्रवाई

भोपाल । मध्यप्रदेश में 2011 के बाद 1 मई से जनगणना का काम शुरू होने जा रहा है. यह पहला मौका होगा जब पूरी जनगणना डिजीटल माध्यम से की जाएगी. आम व्यक्ति मोबइल एप पर खुद भी जनगणना से जुड़ी पूरी जानकारी दे सकता है. जनगणना के पहले अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भोपाल आए गृह विभाग के सचिव और जनगणना के नोडल अधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि जनगणना के दौरान हर व्यक्ति को जनगणना से जुड़ी जानकारी देना अनिवार्य होगा. ऐसा न करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
15-16 साल बाद जनगणना, वो भी डिजिटल
राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन हॉल में जनगणना को लेकर ट्रेनिंग सेशन हुआ. इसमें प्रदेश भर के कलेक्टर, कमिश्नर और नगर निगम आयुक्तों को बुलाया गया. बैठक में प्रशिक्षण देने दिल्ली से आए गृह विभाग के सचिव अभिषेक सिंह ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा, 15-16 साल बाद होने जा रही जनगणना में इस बार डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जाएगा. जनगणना के दौरान सरकारी कर्मचारी प्रगणक मोबाइल एप का उपयोग कर जनगणना करेंगे. जनगणना के लिए कुछ विशेष डिजिटल टूल तैयार किए गए हैं, इसमें ही प्रगणक घर-घर जाकर लोगों के परिवार और उनसे जुड़ी जानकारी जुटाएंगे. डेटा को एप के माध्यम से रियल टाइम पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा
15 अप्रेल से भर सकेंगे ऑनलाइन जानकारी
इस बार जनगणना में आम नागरिक एप के माध्यम से जनगणना से जुड़ी तमाम जानकारी खुद ही भर सकेंगे. अभिषेक सिंह ने बताया, यह बेहद आसान होगा, इसमें एक पेज खुलेगा, जिसमें एक-एक कर पूरी जानकारी भरनी होगी और यह जानकारी अपलोड हो जाएगी. हालांकि, इसके बाद भी प्रगणक घर पहुंचेंगे और जानकारी भरे जाने की पुष्टि करेंगे. इससे प्रगणक का समय बचेगा और लोगों की सहभागिता भी इसमें होगी।
15-16 साल बाद जनगणना, वो भी डिजिटल
उन्होंने बताया कि जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई तक होगा, लेकिन लोगों द्वारा 15 अप्रेल से 30 अप्रेल तक अपना डाटा खुद भरा जा सकेगा. कई बार डेटा भरने में गलती हो जाती है. इसलिए प्रगणक खुद पहुंचकर चौक करेंगे. जनगणना में जानकारी देना और सही जानकारी देना अनिवार्य है. जानकारी देने से रोका तो कार्रवाई होगी.
जनगणना में जानकारी नहीं देने पर कार्रवाई का प्रावधान
यदि कोई जानकारी देने से इंकार करता है या दूसरों को देने से रोकता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने का प्रावधान किया गया है. गृह विभाग के सचिव ने कहा, जनगणना में किसी को झूठी जानकारी देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनगणना के बाद पूरे क्षेत्र की जनता के हिसाब से डाटा तैयार किया जाता है, इसमें किसी एक व्यक्ति के डाटा का कोई महत्व नहीं होता और न ही किसी व्यक्ति की जानकारी सार्वजनिक की जाती है. कानून में प्रावधान है कि जनगणना की व्यक्तिगत जानकारी किसी को नहीं बताई जाएगी।
दसूरे चरण में जातिगत जनगणना
गृह विभाग के मुताबिक जनगणना का दूसरा और अंतिम चरण फरवरी 2027 को होगा. दूसरे चरण में जातिगत जनगणना होगी. इसके लिए प्रदेश में अधिकारियों का प्रशिक्षण अलग से कराया जाएगा. पहले चरण में सिर्फ लोगों की व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाएगी।
एमपी में जनगणना को लेकर क्या बोले मोहन यादव?
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, आदिवासी अंचलों में छोटे-छोटे मजरे टोले हैं, जनगणना में आप इसकी भी चिंता करेंगे. जनगणना से निचला स्टाफ भी जुड़ेगा. जनगणना के दौरान उनके सामने कई तरह की चुनौतियां आएंगी. इसमें ग्वालियर चंबल, विंध्य जैसे क्षेत्र की चुनौती भी होगी. हमारे बीच में राजनीतिक दृष्टि से और भी बाकी दृष्टि से जनगणना के कई अर्थ निकलेंगे. उनसे निपटने की तैयारी में स्पष्ट रहे कि आंकड़ों में पारदर्शिता रहे. पारदर्शिता और प्रतिबद्धता में हमारी निष्पक्षता भी सबसे पहले रहना चाहिए।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा, जनगणना के दौरान लोगों के बीच जागरूकता लानी होगी कि वह सही जानकारी दें. लोगों को बताना होगा कि यदि वे कोई बात छुपाएंगे तो उससे न तो उन्हें कोई न तो फायदा होगा और न नुकसान. क्योंकि जनगणना का किसी भी व्यक्ति के डाटा से कोई मतलब नहीं है।
देना होगा 33 सवालों का जवाब
जनगणना में लोगों को 33 सवालों का जवाब देना होगा. इसमें मकान की जानकारी, घर किस प्रकार का है? कमरे कितने हैं? घर किराए या स्वयं का है? परिवार की जानकारी, इसमें घर में रहने वाले परिवारों की संख्या, विवाहित दंपत्तियों और बच्चों की जानकारी, घर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जैसे टीवी, फ्रिज, लैपटॉप, कम्प्यूटर, साइकिल, कार की जानकारी और परिवार द्वारा उपयोग किए जाने वाले मुख्य अनाज की भी जानकारी ली जाएगी।

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