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व्यापम कांड के आरोपियों को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की डॉ जौहरी की याचिका - Nand Kesari || Top News || Latest News

व्यापम कांड के आरोपियों को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की डॉ जौहरी की याचिका

हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने खारिज की आरोपी की याचिका
ग्वालियर। हाईकोर्ट में व्यापम कांड के आरोपी डॉ जौहरी द्वारा लगायी गई याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने साफ लहजे में कहा है कि, ष्जिन आरोप के आधार पर दायर पुनर्विचार याचिका वापस ली जा चुकी हो, उन्ही आधार पर दोबारा राहत नहीं मांगी जा सकती।
व्यापम कांड के आरोपियों की याचिका निरस्त
व्यापम द्वारा आयोजित प्री-पीजी परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े को लेकर हाईकोर्ट में मामला लंबित है. इसी मामले में डॉ मुकेश जौहरी समेत अन्य आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगल पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया है. डॉ जौहरी समेत अन्य आरोपियों ने याचिका में सीबीआई द्वारा दर्ज आपराधिक कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है.
आरोप पता थे फिर भी वापस ली थी याचिका, दोबारा राहत की उम्मीद नहीं
हाईकोर्ट के वकील एडवोकेट विश्वजीत रतोनिया के मुताबिक, ष्इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि, जब मामले में आरोप तय हो चुके हैं और पहले ही याचिकाकर्ता इन आरोपों के आधार पर लगायी अपनी पुनर्विचार याचिका को भी वापस ले चुके हैं, तो उन्हें अपने ऊपर लगे आरोप पता थे, उसके बाद भी याचिका वापस ली थी. इसलिए अब फिर से धारा 482 के तहत राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती है.इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि, इस प्रकरण में पहले ही चालान पेश हो चुका है और गवाहों के बयान भी दर्ज हुए हैं. इसलिए यह नहीं माना जा सकता है कि, आपराधिक कार्रवाई रुकी हुई है अथवा अभियोजन में देरी हो रही है।
साल भर पहले भी लगायी थी पुनर्विचार याचिका
कोर्ट ने कहा कि आरोपियों के सभी तर्क पूर्व सुनवाई में ही उपलब्ध थे, इसलिए उन्हें फिर से दोहराने की जरूरत नहीं है. इस आधार पर याचिका खारिज कर दी गई है. व्यापम फर्जीवाड़े की जांच के बाद पेश रिपोर्ट और चालान के बाद तय किये गए आरोपों को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट में केस की सुनवाई चल रही है. डॉ मुकेश जौहरी और अन्य आरोपियों ने अपने बचाव के लिए सीबीआई की अपराधिक कार्रवाई और आरोप पत्र के आधार पर पिछले साल एक पुनर्विचार याचिका भी लगायी थी, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने उसे वापस ले लिया था, लेकिन हाल ही एक बार फिर उन्ही तथ्यों के आधार पर याचिका पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में दोबारा दायर करायी गई थी।

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