एमपी में गायब हुए 1.26 लाख लोग
भोपाल। मध्य प्रदेश से गायब 1 लाख 26 हजार लोगों के परिवारों को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एमपी पुलिस द्वारा दिए गए आदेश से थोड़ी राहत मिलेगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश पुलिस में नई व्यवस्था लागू की गई है. प्रदेश में अब किसी वयस्क युवक-युवती अचानक गायब होने पर पुलिस को अब उसकी एफआईआर दर्ज करना होगी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
अभी तक ऐसे मामलों में पुलिस सिर्फ शिकायती आवेदन लेती थी, इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ बाकी में कार्रवाई भी न के बराबर होती थी. मिसिंग पर्सन के मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है. प्रदेश में 1 लाख 26 हजार 163 लोग लापता हैं. इनमें 89352 महिलाएं जबकि 36811 पुरुष हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद बदला नियम
वयस्कों की गुमशुदगी के मामले में एफआईआर का नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू हुआ है. दरअसल, जी गणेश बनाम तमिलनाडु राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है. तमिलनाडु के जी गणेश की नाबालिग बेटी साल 2011 में लापता हो गई थी. कई जांच के बाद भी बच्ची का पता नहीं चला और पुलिस ने मामले को अनडिटेक्टेबल मानकर केस को बंद कर दिया था. इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी गुमशुदा व्यक्तियों चाहे वह महिला हो या पुरुष पर भी लागू कर दी है.
गुमशुदगी के मामले में अब तक अधिकांश मामलों में पुलिस सिर्फ शिकायती आवेदन लेती थी. एफआईआर और गंभीरता आमतौर पर महिलाओं के उन्हीं मामलों में दिखाई देती थी, जिसमें अपहरण या किसी दूसरे अपराध होने का संदेह होता था, लेकिन अब गुमशुदगी के हर मामले में पुलिस को एफआरआई करनी होगी. पीड़ित परिजन के शिकायत लेकर पहुंचने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 140 (3) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी.
हालांकि स्पेशल डीजी महिला अपराध अनिल कुमार के मुताबिक ष्अब वयस्कों की गुमशुदगी के मामलों में अपहरण, मानव दुर्व्यापार और दूसरे अपराध के तथ्य मिलने पर इससे जुड़ी धाराओं को भी जोड़ा जाएगा. यानी गुमशुदगी के मामले में एफआईआर तो दर्ज होगी, लेकिन इसके बाद पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. यदि जांच में ह्यूमन ट्रैफिकिंग, अपहरण या कोई दूसरे गंभीर अपराध के तथ्य नहीं मिले तो धाराएं नहीं बढ़ेंगी.
मध्य प्रदेश से गायब होने वालों के आंकड़े चौंकाने वाले
मध्य प्रदेश से बच्चों के गायब होने के अलावा वयस्कों के गायब होने के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक मिसिंग पर्सन के मामले में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है. साल 2024 में मध्य प्रदेश में 65 हजार 338 लोग गुमशुदा हुए, इसमें युवतियों की संख्या सबसे ज्यादा है. गायब हुई महिलाओं की संख्या 46732 और पुरुषों की संख्या 18 हजार 606 है.
मध्य प्रदेश में पिछले सालों से गुम 60 हजार 825 लोगों को अभी तक नहीं खोजा जा सका है. इनमें 42620 महिलाएं और 18 हजार 205 पुरुष हैं.प्रदेश में कुल 1 लाख 26 हजार 163 लोग लापता हैं. इसमें महिलाओं की संख्या 89 हजार 52 और पुरुषों की संख्या 36 हजार 811 है. गायब होने वालों में ज्यादा संख्या देश में महाराष्ट्र में है. महाराष्ट्र में कुल 1 लाख 30 हजार लोग मिसिंग हैं.
उधर साल 2024 में देश में सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल से महिलाएं गायब हुई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम बंगाल में साल 2024 में देश में सबसे ज्यादा 46 हजार 838 महिलाएं गायब हुई हैं. जबकि सबसे बड़े जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में यहा आंकड़ा बहुत कम है. उत्तर प्रदेश में कुल 30 हजार 147 लोग मिसिंग हैं।
