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ओबीसी के 13 फीसदी होल्ड पदों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को लगाई फटकार - Nand Kesari || Top News || Latest News

ओबीसी के 13 फीसदी होल्ड पदों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एमपी सरकार को लगाई फटकार

भोपाल। एमपीपीएससी में 13 प्रतिशत पद होल्ड करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द ही अंतिम फैसला सुना सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को प्रमुखता देते हुए टॉप अॉफ द बोर्ड की श्रेणी में रखा है. फैसला आने तक अब इस मामले की सुनवाई 23 सितंबर से सुप्रीम कोर्ट में रोज होगी. वहीं बीते 6 साल से एमपीपीएससी में 13 प्रतिशत पद होल्ड होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई.
दरअसल साल 2019 में कमलनाथ सरकार ने ओबीसी वर्ग के लिए तय आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था. लेकिन साल 2020 में हाईकोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए कहा था कि कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता. इसके बाद 2021 में सरकार ने एक नई गाइड लाइन जारी की।
इसके अनुसार तत्कालिक महाधिवक्ता के अभिमत के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अनुमति दी. लेकिन अगस्त 2023 में हाईकोर्ट ने 87-13 फार्मूला लागू किया. जिससे 87 प्रतिशत पदों पर भर्ती की गई, जबकि बचे हुए 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इस मामले में जस्टिस पीएस नरसिम्हा एवं जस्टिस एएस चंदूरकार की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई. जज ने कहा कि एमपी सरकार सो रही है क्या, ओबीसी के 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर 6 साल में क्या किया? जज ने सरकारी वकील से कहा कि 6 वर्षो से नींद मे सो रहे हैं, अब स्टे वैकेंटिंग लगाने को लेकर नींद खुली है. जब इस मामले में कोई स्टे नहीं है, तो फिर सरकार ने स्टे वैकेंट क्यों लगाया? हालांकि जज की फटकार के बाद सरकार के वकील कुछ भी जबाव नहीं दे पाए.
23 सितंबर से रोज होगी सुनवाई
ओबीसी के 13 प्रतिशत पदों के होल्ड होने को लेकर ओबीसी महासभा की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी, अनूप जार्ज चैधरी, रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने अपना पक्ष रखा।
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि इस मामले में सुप्रीम कार्ट या हाईकोर्ट का कोई स्टे नहीं है. मध्य प्रदेश सरकार चाहे तो आज से ही ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण लागू कर सकती है. और ओबीसी के 13 प्रतिशत पदों को अनहोल्ड कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने 23 सितंबर 2025 से अब इस मामले की प्रतिदिन सुनवाई करने की बात कही है. जब तक कि इसका अंतिम फैसला नहीं आ जाता है।
सरकारी वकीलों ने जल्द सुनवाई की मांग की
मध्य प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2019 ओबीसी आरक्षण की संवैधानिक वैधता को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम. नटराज और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट में तर्क रखे. इनके द्वारा बताया गया कि उच्च न्यायालय द्वारा ओबीसी आरक्षण पर स्थगन के कारण नई भर्तियों में आ रही दिक्कत की गम्भीरता को देखते हुए जल्द सुनवाई की जाए.
मुख्यमंत्री विधानसभा के मानसून सत्र में कर चुके घोषणा
बता दें मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले ही विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य में ओबीसी वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण की प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं. सीएम ने विधानसभा में कहा था कि हम डंके की चोट पर कह रहे हैं 27 फीसदी आरक्षण देंगे. कई विभागों के अंदर जहां स्टे नहीं था वहां पहले ही हमने 27 फीसदी आरक्षण दे दिया है. उन्होंने यह भी कहा था कि जहां कोर्ट में मामला अटका है, वहां भी हम अपनी तरफ से सरकार के पक्ष में 27 फीसदी आरक्षण की बात लिखकर दे रहे हैं।

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