गांधी शिल्प बाजार में आयोजकों ने नहीं लगाई गांधी जी की फोटो!

x
ग्वालियर। देश के विभिन्न प्रांतों की अद्भंुत हस्तशिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिये ग्वालियर व्यापार मेले के समीप लगाये गये जिला स्तरीय गांधी शिल्प बाजार में आयोजनकर्ताओं द्वारा भारी अनियमिततायें जानबूझ कर की जा रही है। जिसके चलते गांधी शिल्प बाजार का नाम धूमिल हो रहा है। बता दें आर्थिक रूप से कमजोर एससी/एसटी वर्ग के लोगों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन स्वरूप इस तरह के बाजार लगाये जाते जिसमें सरकार की ओर से शिल्पियों को आर्थिक सहायता देकर उनके बनाये सामान को बाजार में लाकर बिक्रित करवाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाना भी है इसी सोच के चलते गांधी शिल्प बाजार जैसे मेले के आयोजन किये जाते है। गांधी शिल्प बाजार को सरकार के ही कर्मियों द्वारा जमकर पलीता लगाया जा रहा है।

सर्व प्रथम गांधी नाम को लेकर लोग भ्रमित हैं लोग सवाल कर रहे है कि कौन से गांधी जी है जिनके नाम पर शिल्प मेला लगाया गया है। इसका कारण कि आयोजनकर्ताओं ने न तो गांधी जी की फोटो लगाना मुनासिब समझा और ना ही गांधी के पूरे नाम को कहीं भी अंकित किया गया है। लोग सवाल कर रहे है कि आखिर आयोजकों को फोटो को लगाने में शर्म क्यों आई। यही नहीं इस बार का मेला कही भी मेला जैसा नहीं दिखा है। देखने में मेला विरान नजर आ रहा है। ना कोई चहल-पहल,न कहीं कोई रौनक नजर आ रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि मात्र खाना पूर्ति कर सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि को नुक्ताचीनी करना इनकी मंशा है। रात्रि के समय मेले मे पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था न होने के कारण खरीददार मेले में दाखिल होने से कतरा रहे है। जिसकी वजह से दूर दराज से आये शिल्पियों के सामान की बिक्री पर सीधा प्रभाव पड रहा है। साफ-सफाई व शुद्व पीने के पानी के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है। आयोजकों की मनमानी और इनकी बदनियती के चलते शिल्पियों को उतना प्रोत्साहन उतना नही मिल पा रहा है जितने के वास्तविक अधिकारी है। अब देखना यह है कि उच्च स्तरीय अधिकारियों द्वारा मेले के आयेाजनकर्ताओं द्वारा खर्च की जाने वाली राशि का किस तरह और किन बिन्दुओं को दृष्टिगत रखते हुये भुगतान किया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *