ग्वालियर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जन संघ के प्रमुख विचारक और एकात्म मानववाद के प्रणेता थे। उन्होंने अंत्योदय का सिद्धांत दिया, जिसका अर्थ है समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान। भाजपा की विचारधारा के मूल में पंडित दीनदयाल के विचार हैं। उन्होंने गरीब कल्याण और स्वदेशी अर्थव्यवस्था पर विशेष बल दिया। पंडित दीनदयाल का जन्म 25 सितंबर 1916 को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में हुआ था। वे एक महान राष्ट्रवादी विचारक और राजनीतिक दार्शनिक थे। पंडित दीनदयाल की विचारधारा आज भी देश के विकास में मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही है। उक्त बात बात पूर्व जिला अध्यक्ष अभय चौधरी ने गुरुवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर महाराजा मानसिंह मंडल द्वारा चंदनपुरा के वार्ड क्रमांक 16 शक्ति केंद्र पर सेवा पखवाड़ा के तहत आयोजित स्वच्छता कार्यक्रम में कही। इस दौरान उन्होंने पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें याद किया। इस दौरान उन्होंने एक पेड़ मां के नाम के अंतर्गत पौध रोपण भी किया।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय सादा जीवन उच्च विचार और दृढ संकल्प व्यक्तित्व के धनी थे । वह एक मेधावी छात्र, संगठक, लेखक, पत्रकार, विचारक, राष्ट्रवादी और एक उत्कृष्ट मानववादी थे। उनके सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में सबसे कमजोर और सबसे गरीब व्यक्ति की चिंता सदैव की थी । गरीबों व मां भारती की सेवा करने के भाव को लेकर जबरदस्त उत्साह, जज्बे, जुनून और दृढ विश्वास के साथ वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में शामिल हुए और 29 दिसम्बर 1967 को जनसंघ के अध्यक्ष बने। उन्होंने एक मजबूत, जीवंत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के विचार को आगे बढाने के लिए अथक प्रयास किया। उनका मानना था कि स्वदेशी और लघु उद्योग भारत की आर्थिक योजना की आधारशिला होनी चाहिए जिसमें सद्भाव, संस्कृत, राष्ट्रीय नीति और अनुशासन का समावेश हो। स्वदेशी की प्राथमिकता रखते हुए वह विश्व स्तर पर हो रहे नवाचारों को अपनाने के लिए कतई खिलाफ नहीं थे। इस अवसर पर प्रदेश का समिति सदस्य ओम प्रकाश शेखावत, मंडल अध्यक्ष योगेंद्र सिंह तोमर, पार्षद महेन्द्र, सेवा पखवाड़ा के प्रभारी धर्मेंद्र आर्य, सह प्रभारी धर्मेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता जगन्नाथ सिकरवार, ओम प्रकाश तोमर, बूथ अध्यक्ष श्रीमती कमला सहित मंडल के पदाधिकारी एवं ज्येष्ठ श्रेष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भाजपा की विचारधारा के मूल में पंडित दीनदयाल जी के विचार: अभय चौधरी
