केंद्रीय कैबिनेट ने शहरी कायाकल्प के लिए एक लाख करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी

नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को एक लाख करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता के साथ अर्बन चौलेंज फंड शुरू करने को मंजूरी दे दी. इस संबंध में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मीडिया को बताया कि इस योजना के तहत केंद्र सरकार परियोजना की लागत का 25 फीसदी हिस्सा वहन करेगी, बशर्ते कि कम से कम 50 फीसदी धन बाजार से जुटाया गया हो।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस पहल से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है. सरकार ने कहा है कि उसका यह कदम भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है. इसके तहत अब अनुदान आधारित वित्तपोषण के बजाय बाजार से जुड़े, सुधार-आधारित और परिणाम-उन्मुख बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया जाएगा।
साथ ही कहा गया है कि यूसीएफ उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए बाजार वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा।बयान के मुताबिक, इस कोष का टारगेट शहरों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति सक्षम, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल बनाना है, ताकि वे देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख वाहक बन सकें।
यह कदम बजट 2025-26 में घोषित सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें शहरों को विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने, शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास और जल एवं स्वच्छता से संबंधित प्रस्तावों को लागू करने की बात कही गई है.
पहाड़ी या उत्तर-पूर्वी राज्यों के छोटे शहरों और कस्बों की मदद के लिए सरकार ने 5,000 करोड़ रुपये का खास फंड अलग रखा है. यह उन शहरों के लिए क्रेडिट गारंटी का काम करेगा जो पहली बार बाजार से उधार ले रहे हैं. इसका मकसद इन स्थानीय निकायों को ज्यादा विश्वसनीय बनाना है, ताकि वे आखिर में अपनी विकास के लिए फंड दे सकें. सरकार ने कहा कि इससे पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के सभी शहरों/शहरी स्थानीय निकायों और छोटे शहरी स्थानीय निकायों को पहली बार मार्केट फाइनेंस तक पहुंच आसान हो जाएगी।

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