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आखिर कहां गई 5 करोड़ की रामलला की सोने की रामचरितमानस, महाग्रंथ गायब होने पर अयोध्या में बवाल - Nand Kesari || Top News || Latest News

आखिर कहां गई 5 करोड़ की रामलला की सोने की रामचरितमानस, महाग्रंथ गायब होने पर अयोध्या में बवाल

केजरीवाल ने का तीखा हमला ,कहा ये महापाप
नई दिल्ली। अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर इन दिनों चढ़ावे चोरी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। लेकिन, अब इस विवाद में एक ऐसा नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है, जिसने सियासत से लेकर आस्था के गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय गृह सचिव द्वारा मंदिर में पूरी श्रद्धा के साथ भेंट की गई 5 करोड़ रुपए की सोने की रामचरितमानस भी कहीं गायब हो गई है। इस खुलासे के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी तीखा हमला बोलते हुए इसे महापाप करार दिया है।
चढ़ावे और आभूषणों की हेराफेरी की लिस्ट दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही है। ताजा विवाद पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण द्वारा भेंट किए गए उस बहुमूल्य महाग्रंथ को लेकर है, जिसकी चमक से कभी पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा था। अब आरोप लग रहे हैं कि करोड़ों रुपए की यह गोल्ड-प्लेटेड रामचरितमानस मंदिर से नदारद है।
केजरीवाल का श्एक्सश् पर तीखा वार
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म श्एक्सश् पर इस मुद्दे को उठाते हुए सीधे निशाना साधा है। केजरीवाल ने लिखा कि पूर्व गृह सचिव द्वारा पूरी श्रद्धा से चढ़ाई गई एक किलो सोने की रामचरितमानस भी गायब है। चंदा चोरों ने महापाप किया है।
रसीद मिली न ठौर-ठिकाना
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव का दावा है कि उन्होंने करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती रामचरितमानस को राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा था। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी भेंट के बावजूद उन्हें ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। उनका कहना है कि आज तक उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि आस्था का यह अनमोल प्रतीक आखिर किस लॉकर या स्थान पर सुरक्षित रखा गया है।
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कैसी थी यह 5 करोड़ की सोने की रामचरितमानस!
यह कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि कला और आस्था का एक अद्भुत चमत्कार था। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने इसे पिछले साल 10 अप्रैल 2024 को चौत्र नवरात्रि के पहले दिन ट्रस्ट को सौंपा था। इस अनोखे ग्रंथ का कुल वजन करीब 147 किलो था, जिसे तैयार करने में 24 कैरेट सोने, चांदी और तांबे का इस्तेमाल किया गया था। इसमें करीब 1 किलो शुद्ध सोना लगा था। इसके 522 गोल्ड-प्लेटेड पन्नों पर विशेष तकनीक से रामचरितमानस के 10,902 दोहे, चौपाइयां और श्लोक उकेरे गए थे। इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपए है और इसे बनाने में कारीगरों को पूरे 8 महीने का वक्त लगा था।
क्या सबूत मिटाने के लिए पिघलाए गए गहने?
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और सोने-चांदी के आभूषणों में गड़बड़ी की गूंज पहले ही शासन तक पहुंच चुकी है। इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है, जिसकी जांच की समय-सीमा को भी बढ़ा दिया गया है। जांच एजेंसियां इस खौफनाक पहलू पर भी काम कर रही हैं कि कहीं चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की पहचान छिपाने के लिए उन्हें पिघला तो नहीं दिया गया?
इस बीच, 5 करोड़ की रामचरितमानस के गायब होने के दावे ने आग में घी का काम किया है। हालांकि, इस पूरे बवाल और गंभीर आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या स्पष्ट सफाई सामने नहीं आई है। भक्त और जनता अब केवल एक ही सवाल पूछ रहे है आखिर कहां गई रामलला की सोने की रामचरितमानस।

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