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भारत बंदः एमपी में बैंक, बीमा और बीएसएनएल ठप,कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन - Nand Kesari || Top News || Latest News

भारत बंदः एमपी में बैंक, बीमा और बीएसएनएल ठप,कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

भोपाल। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर गुरुवार को मध्य प्रदेश में भी भारत बंद का व्यापक असर देखने को मिला. राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, कटनी और रतलाम समेत अन्य जिला और तहसील स्तरों तक केंद्रीय कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. इससे बैंक, बीमा, बीएसएनएल, डाक विभाग समेत कई केंद्रीय संस्थानों में कामकाज प्रभावित रहा. गुरुवार को केंद्रीय कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से प्रदेश में 6 हजार से अधिक बैंक शाखाओं पर असर पड़ने का अनुमान है.
राजधानी में पीएनबी के सामने प्रदर्शन
भोपाल के एमपी नगर स्थित पीएनबी के सामने केंद्रीय कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी की. कर्मचारियों ने 4 श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग उठाई और सरकार पर श्रमिक हितों की अनदेखी का आरोप लगाया. जबकि इंदौर में अखिल भारतीय संयुक्त अभियान समिति के बैनर तले गांधी हाल परिसर में आशा, उषा और अन्य कर्मचारी संगठनों ने धरना दिया. प्रदर्शनकारियों ने मजदूर विरोधी नीतियों को वापस लेने और श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की.
उज्जैन, जबलपुर, कटनी और रतलाम में भी असर
उज्जैन के टावर चौक पर सीटू के बैनर तले एलआईसी, आयकर, बीएसएनएल और अन्य केंद्रीय कर्मचारियों के साथ आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया. जबलपुर, इटारसी और कटनी में ऑर्डिनेंस फैक्टरी के कर्मचारियों ने काम रोककर विरोध दर्ज कराया. वहीं रतलाम में ट्रेड यूनियनों की संयुक्त समिति ने प्रदर्शन किया. अन्य जिलों में भी कर्मचारी संगठनों ने समर्थन दिया. इसी प्रकार प्रदेश के अन्य शहरों में नए श्रम कानूनों के विरोध में कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाई.
नए नियमों से मजदूरों को रोजगार बचाने की चुनौती
मध्य प्रदेश बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा ने कहा कि देशभर में करीब 25 करोड़ कर्मचारी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलनरत हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि 29 श्रम कानूनों को खत्म कर चार श्रम संहिताओं में समेट दिया गया है, जिससे मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे. उन्होंने न्यूनतम वेतन 36 हजार रुपये प्रतिमाह तय करने की मांग भी दोहराई.
वीके शर्मा के अनुसार केंद्र सरकार ने जो श्रम कानून में परिवर्तन किए उनको वापस ले. केंद्र सरकार ने आनन-फानन में मजदूरों के जो 29 श्रम कानून थे. जिसे मजदूर और कर्मचारियों ने अपने संघर्षो के जरिए हासिल किए थे. औद्योगिक घरानों के इशारों पर उन कानूनों को खत्म करके 4 श्रम संहिताओं में समेट दिया है. यदि ये श्रम संहिताएं लागू होंगी तो मजदूर को अपनी नौकरी बचाना मुश्किल होगा.
कर्मचारी संगठनों ने दी सरकार को चेतावनी
कर्मचारी नेता प्रमोद प्रधान ने कहा, यदि श्रम संहिताएं वापस नहीं ली गईं तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा. उनका आरोप है कि सरकारी संस्थानों के निजीकरण और नई रोजगार नीतियों से स्थानीय रोजगार पर संकट गहराया है. बता दें कि भारत बंद के कारण बैंकिंग, बीमा, डाक और अन्य केंद्रीय सेवाओं में कामकाज आंशिक रूप से बाधित रहा।
कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा. गुरुवार की हड़ताल में 10 केंद्रीय श्रमिक संगठन और 100 से अधिक स्वतंत्र यूनियन फेडरेशन शामिल हैं. हड़ताल के कारण कोल माइंस, बैंक, फैक्ट्री, खेत-खलिहान, बीमा, एलआईसी, पोस्ट ऑफिस, आयकर और अन्य केंद्रीय विभागों में कर्मचारियों ने काम रोक दिया।

जबलपुर में रक्षा मंत्रालय की कई फैक्ट्रियां हैं इन सभी में आज सरकार के नए श्रम कानून के विरोध में प्रदर्शन किया गया. गन कैरिज फैक्ट्री के वर्क कमेटी के नेता अमित चंदेल का कहना है कि सरकार के नए कानून श्रमिक विरोधी हैं. इसलिए आज हमने सभी फैक्ट्री में 1 घंटे काम ना करके अपना विरोध दर्ज करवाया है. जबलपुर की सभी फैक्ट्रियों में कर्मचारी 1 घंटे लेट पहुंचे.
मध्य प्रदेश बैंक एम्पलाई संगठन के महासचिव अरविंद पोरवाल बताते हैं, बैंकों के पास हर साल अपनी बैलेंस शीट में सबसे बड़ा हिस्सा सेवा शुल्क से प्राप्त राशि का होता है. इस राशि से बैंक ऑपरेटिंग कॉस्ट, एटीएम, चेक बुक, डिजिटल बैंकिंग, बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, स्टाफ की सैलरी, तकनीकी और बुनियादी विकास में करती है।
सर्विस चार्ज पर जो जीएसटी लगता है वह राशि जीएसटी के रूप में केंद्र सरकार को दी जाती है. इसके अलावा अन्य प्राप्त आमदनी को मिलाकर डिविडेंड के रूप में रिजर्व बैंक को दिया जाता है जो रिजर्व बैंक द्वारा केंद्र सरकार को दिया जाता है. पिछले साल 3 लाख करोड़ रुपये केंद्र को मिला जबकि उसके पूर्व ढ़ाई लाख करोड़ और पहले डेढ़ लाख करोड़ सरकार ले चुकी है।

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