नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके विरोध स्थल से कथित तौर पर जबरदस्ती हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस पर विपक्षी पार्टियों ने भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया.विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कथित नीट पेपर लीक पर जनता की चिंताओं को दूर करने के बजाय लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है।
इस घटना पर कड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हुईं, जिसमें पार्टी लाइन से हटकर नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन पर कार्रवाई करके जवाबदेही के बजाय जबरदस्ती को चुना है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए.
बेबी ने कहा कि, वह सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि, जिस शिक्षा मंत्री की नाक के नीचे पेपर लीक हुआ, उन्हें हटाने और लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाले सिस्टम को खत्म करने के बजाय, सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सख्ती कर रही है. यह मोदी सरकार का तानाशाही रवैया दिखाता है. बेबी ने कहा कि, असहमति को दबाना जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का जवाब परीक्षा विवाद पर मुश्किल सवालों का जवाब देने की अनिच्छा दिखाता है. उन्होंने कहा, ष्यह तानाशाही जवाब सिर्फ यह दिखाता है कि वह (सरकार) जिम्मेदार नहीं है.ष् साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस नेतृत्व में बदलाव के समय पर भी चिंता जताई.
बेबी ने आगे कहा, ष्इस कार्रवाई से ठीक पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अचानक हटाना पुलिस मशीनरी के राजनीतिक गलत इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है.ष् वांगचुक, जो कथित नीट पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे, उन्हें शनिवार सुबह विरोध स्थल से हटा दिया गया.
प्रदर्शन के आयोजकों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के लोग सुबह-सुबह जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गए, जिसकी विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसाइटी समूहों ने तुरंत निंदा की.
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय पर संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया. खेड़ा ने कहा, ष्हमारा संविधान असहमति के अधिकार की गारंटी देता है. गृह मंत्रालय इसे नकारने पर तुला हुआ लगता है.ष् यह बताते हुए कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करती है, खेड़ा ने पुलिस कार्रवाई को एक दिन पहले दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति से जोड़ा.
उन्होंने कहा, ष्दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है. वही मंत्रालय जिसने कल ही दिल्ली में नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है. अगर आज की कार्रवाई उनकी पहली ब्रीफिंग है, तो यह एक डरावना संदेश देती है. राजनीतिक आज्ञाकारिता संवैधानिक कर्तव्य से ज्यादा जरूरी है।खेड़ा ने आगे सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बार-बार दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ष्महिला पहलवानों को घसीटने से लेकर एक्स-सर्विसमैन के साथ बदसलूकी करने तक, इस सरकार ने बार-बार संविधान के प्रति अपनी बेइज्जती दिखाई है. आज की हरकतें इस सरकार की सोच को दिखाती हैं. यह शर्म की बात है कि दुनिया की सबसे
बड़े लोकतंत्र पर दुनिया की सबसे अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र विरोधी राजनीतिक पार्टी राज कर रही है।
आलोचनाओं में शामिल होते हुए, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने वांगचुक को हटाने को श्लोकतंत्र और संविधान पर हमलाश् करार दिया. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, कि, यह तनाशाही है. सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं कर सकती.पुलिस की कार्रवाई ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले आंदोलन को भी तेज कर दिया है, जो कथित परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही है।
वांगचुक को हटाए जाने के बाद, सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत डिपके ने ऐलान किया कि उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है और आंदोलन की मांगों को और बढ़ा दिया है. दिपके ने कहा, “मैं आज से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहा हूं. मैं सभी से अपील करता हूं कि, पीछे न हटें. यह आंदोलन और बड़ा होगा.ष् उन्होंने आंदोलन का फोकस बदलने का भी ऐलान किया. उन्होंने कहा कि, अभी तक तो वे लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. इस घटिया काम के बाद, अब वे लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करेंगे.
दूसरी तरफ, सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद शरद पवार, संजय राउत और कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना की. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक की मांग जायज है. शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के सांसद संजय राउत ने भी कहा है कि यह सरकारी जुल्म है. वहीं, विधायक रोहित पवार ने श्एक्सश् पर एक पोस्ट में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की. शरद पवार ने चेतावनी दी कि यह मामला यहीं नहीं रुकेगा. उन्होंने कहा कि, संसद का मानसून सत्र जब शुरू होगा तब इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी.
वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि, देश तानाशाही के रास्ते पर चल रहा है. यह जुल्म है. उन्होंने कहा कि, सोनम वांगचुक जिस मुद्दे के लिए 21 दिनों तक अनशन पर रहे, सरकार ने उसे हल नहीं किया. उनका अनशन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि, लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान देने को तैयार सोनम वांगचुक को पुलिस जबरदस्ती उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया. इससे पता चलता है कि यह देश कितनी तानाशाही से चल रहा है. संजय राउत ने कहा कि, अगर सरकार को वांगचुक की जान की इतनी ही परवाह होती, तो वह अनशन शुरू होने के बाद ही उनकी मांगों पर कोई स्टैंड लेती. लेकिन, सरकार ने कोई स्टैंड नहीं लिया.
राउत ने यह भी आरोप लगाया कि, सोनम वांगचुक के खिलाफ दमन का दूसरा कारण यह है कि आज राम मंदिर में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नागपुर में विरोध हो रहा है. उस घटना से ध्यान हटाने के लिए सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करा दिया. उन्होंने सवाल किया कि, क्या केंद्र सरकार इतनी असुरक्षित हो गई है कि उसने सत्य, अहिंसा और संविधान के रास्ते पर लड़ने वाले एक निहत्थे गांधीवादी व्यक्ति को हजारों पुलिसवालों से घेर लिया है.
राउत ने कहा कि, क्या केंद्र सरकार को शर्म नहीं आई जब उसने सोनम वांगचुक पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया, जिनका शरीर 20 दिन की भूख हड़ताल से कमजोर हो गया था. उन्होंने कहा कि, सत्याग्रह का जवाब दमन से देना लोकतंत्र की नहीं, बल्कि तानाशाही की पहचान है.
वहीं, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ष्मोदी सरकार ने आज उस शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए दमन की सारी हदें पार कर दीं, जिसकी वजह से छात्रों ने आत्महत्या की और लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद किया. बातचीत भारत की आत्मा है, लोकतंत्र का सिद्धांत है. सरकार इससे क्या संदेश देना चाहती है.
विधायक रोहित पवार ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ष्घबराई हुई केंद्र सरकार ने यह महसूस करते हुए कि एक निस्वार्थ व्यक्ति अपने लक्ष्य से दूर नहीं जा रहा है, सीनियर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल वाली जगह से जबरन हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया. सरकार इससे क्या संदेश देना चाहती है… क्या यह संदेश है कि वे आंदोलन को कुचल देंगे, लेकिन मांगें नहीं मानेंगे.ष् वहीं, एनसीपी (एसपी) विधायक जितंदेर आव्हाड ने भी सोनम वांगचुक मामले को लेकर केंद्र पर निशाना साधा।
सोनम वांगचुक को विरोध स्थल से हटाया, गअस्पताल ले गई पुलिस, विपक्ष ने केंद्र की आलोचना की नई दिल्ली। पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनके विरोध स्थल से कथित तौर पर जबरदस्ती हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. इस पर विपक्षी पार्टियों ने भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया.विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कथित नीट पेपर लीक पर जनता की चिंताओं को दूर करने के बजाय लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है। इस घटना पर कड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हुईं, जिसमें पार्टी लाइन से हटकर नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन पर कार्रवाई करके जवाबदेही के बजाय जबरदस्ती को चुना है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव एमए बेबी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की और सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए. बेबी ने कहा कि, वह सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि, जिस शिक्षा मंत्री की नाक के नीचे पेपर लीक हुआ, उन्हें हटाने और लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद करने वाले सिस्टम को खत्म करने के बजाय, सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सख्ती कर रही है. यह मोदी सरकार का तानाशाही रवैया दिखाता है. बेबी ने कहा कि, असहमति को दबाना जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का जवाब परीक्षा विवाद पर मुश्किल सवालों का जवाब देने की अनिच्छा दिखाता है. उन्होंने कहा, ष्यह तानाशाही जवाब सिर्फ यह दिखाता है कि वह (सरकार) जिम्मेदार नहीं है.ष् साथ ही उन्होंने दिल्ली पुलिस नेतृत्व में बदलाव के समय पर भी चिंता जताई. बेबी ने आगे कहा, ष्इस कार्रवाई से ठीक पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर को अचानक हटाना पुलिस मशीनरी के राजनीतिक गलत इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करता है.ष् वांगचुक, जो कथित नीट पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे, उन्हें शनिवार सुबह विरोध स्थल से हटा दिया गया. प्रदर्शन के आयोजकों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के लोग सुबह-सुबह जंतर-मंतर पहुंचे और सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गए, जिसकी विपक्षी पार्टियों और सिविल सोसाइटी समूहों ने तुरंत निंदा की. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय पर संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया. खेड़ा ने कहा, ष्हमारा संविधान असहमति के अधिकार की गारंटी देता है. गृह मंत्रालय इसे नकारने पर तुला हुआ लगता है.ष् यह बताते हुए कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत काम करती है, खेड़ा ने पुलिस कार्रवाई को एक दिन पहले दिल्ली के नए पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति से जोड़ा. उन्होंने कहा, ष्दिल्ली पुलिस सीधे गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है. वही मंत्रालय जिसने कल ही दिल्ली में नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया है. अगर आज की कार्रवाई उनकी पहली ब्रीफिंग है, तो यह एक डरावना संदेश देती है. राजनीतिक आज्ञाकारिता संवैधानिक कर्तव्य से ज्यादा जरूरी है।खेड़ा ने आगे सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बार-बार दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ष्महिला पहलवानों को घसीटने से लेकर एक्स-सर्विसमैन के साथ बदसलूकी करने तक, इस सरकार ने बार-बार संविधान के प्रति अपनी बेइज्जती दिखाई है. आज की हरकतें इस सरकार की सोच को दिखाती हैं. यह शर्म की बात है कि दुनिया की सबसे बड़े लोकतंत्र पर दुनिया की सबसे अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र विरोधी राजनीतिक पार्टी राज कर रही है। आलोचनाओं में शामिल होते हुए, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने वांगचुक को हटाने को श्लोकतंत्र और संविधान पर हमलाश् करार दिया. उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, कि, यह तनाशाही है. सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं कर सकती.पुलिस की कार्रवाई ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले आंदोलन को भी तेज कर दिया है, जो कथित परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही है। वांगचुक को हटाए जाने के बाद, सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत डिपके ने ऐलान किया कि उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है और आंदोलन की मांगों को और बढ़ा दिया है. दिपके ने कहा, “मैं आज से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहा हूं. मैं सभी से अपील करता हूं कि, पीछे न हटें. यह आंदोलन और बड़ा होगा.ष् उन्होंने आंदोलन का फोकस बदलने का भी ऐलान किया. उन्होंने कहा कि, अभी तक तो वे लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे. इस घटिया काम के बाद, अब वे लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करेंगे. दूसरी तरफ, सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद शरद पवार, संजय राउत और कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना की. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक की मांग जायज है. शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी के सांसद संजय राउत ने भी कहा है कि यह सरकारी जुल्म है. वहीं, विधायक रोहित पवार ने श्एक्सश् पर एक पोस्ट में सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की. शरद पवार ने चेतावनी दी कि यह मामला यहीं नहीं रुकेगा. उन्होंने कहा कि, संसद का मानसून सत्र जब शुरू होगा तब इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी. वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि, देश तानाशाही के रास्ते पर चल रहा है. यह जुल्म है. उन्होंने कहा कि, सोनम वांगचुक जिस मुद्दे के लिए 21 दिनों तक अनशन पर रहे, सरकार ने उसे हल नहीं किया. उनका अनशन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि, लाखों छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान देने को तैयार सोनम वांगचुक को पुलिस जबरदस्ती उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया. इससे पता चलता है कि यह देश कितनी तानाशाही से चल रहा है. संजय राउत ने कहा कि, अगर सरकार को वांगचुक की जान की इतनी ही परवाह होती, तो वह अनशन शुरू होने के बाद ही उनकी मांगों पर कोई स्टैंड लेती. लेकिन, सरकार ने कोई स्टैंड नहीं लिया. राउत ने यह भी आरोप लगाया कि, सोनम वांगचुक के खिलाफ दमन का दूसरा कारण यह है कि आज राम मंदिर में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में नागपुर में विरोध हो रहा है. उस घटना से ध्यान हटाने के लिए सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करा दिया. उन्होंने सवाल किया कि, क्या केंद्र सरकार इतनी असुरक्षित हो गई है कि उसने सत्य, अहिंसा और संविधान के रास्ते पर लड़ने वाले एक निहत्थे गांधीवादी व्यक्ति को हजारों पुलिसवालों से घेर लिया है. राउत ने कहा कि, क्या केंद्र सरकार को शर्म नहीं आई जब उसने सोनम वांगचुक पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया, जिनका शरीर 20 दिन की भूख हड़ताल से कमजोर हो गया था. उन्होंने कहा कि, सत्याग्रह का जवाब दमन से देना लोकतंत्र की नहीं, बल्कि तानाशाही की पहचान है. वहीं, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ष्मोदी सरकार ने आज उस शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए दमन की सारी हदें पार कर दीं, जिसकी वजह से छात्रों ने आत्महत्या की और लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद किया. बातचीत भारत की आत्मा है, लोकतंत्र का सिद्धांत है. सरकार इससे क्या संदेश देना चाहती है. विधायक रोहित पवार ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ष्घबराई हुई केंद्र सरकार ने यह महसूस करते हुए कि एक निस्वार्थ व्यक्ति अपने लक्ष्य से दूर नहीं जा रहा है, सीनियर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल वाली जगह से जबरन हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया. सरकार इससे क्या संदेश देना चाहती है… क्या यह संदेश है कि वे आंदोलन को कुचल देंगे, लेकिन मांगें नहीं मानेंगे.ष् वहीं, एनसीपी (एसपी) विधायक जितंदेर आव्हाड ने भी सोनम वांगचुक मामले को लेकर केंद्र पर निशाना साधा।
