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मिसेज इंडिया 2026 बनीं बिहार की डॉ. अपूर्वा वर्मा, छठ पूजा और चुनरी साड़ी ने दिलाया ताज - Nand Kesari || Top News || Latest News

मिसेज इंडिया 2026 बनीं बिहार की डॉ. अपूर्वा वर्मा, छठ पूजा और चुनरी साड़ी ने दिलाया ताज

भोजपुर। आम लोगों के बीच अक्सर यह भ्रम रहता है कि श्शादी और बच्चा होने के बाद महिलाओं का जीवन समाप्त हो जाता हैश्, परंतु यह वास्तव में एक मिथक ही है, जिसे डॉ. अपूर्वा वर्मा ने पूरी तरह तोड़ दिया है. यही कारण है कि आज अपूर्वा के सिर पर श्मिसेज इंडिया 2026श् का ताज सज रहा है. अपूर्वा न केवल बिहार, बल्कि संपूर्ण देश की उन महिलाओं के लिए एक महान प्रेरणा हैं, जो यह मानती हैं कि विवाह और बच्चों के बाद उनकी जिंदगी खत्म हो गई है.
कौन हैं मिसेज इंडिया अपूर्वा वर्मा?: डॉ. अपूर्वा वर्मा मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के अंतर्गत आरा पुलिस लाइन की रहने वाली हैं. उन्होंने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है और वे पेशे से एक शिक्षिका एवं साहित्यकार हैं. उनके द्वारा लिखित पुस्तक द वेट ऑफ इमोशंस 30 से भी अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है.
डॉक्टर अपूर्वा वर्मा श्मिसेज इंडिया 2026
श्परिवार के सहयोग से सफलताश्ः वह एक अत्यंत सामान्य परिवार से संबंध रखती हैं. उनके पिता विजय लाल श्रीवास्तव व्यवसायी हैं, माता सरोज श्रीवास्तव गृहिणी हैं और उनके पति अरुंजय वर्मा भारतीय स्टेट बैंक में प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं. अपूर्वा का कहना है कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उनके परिवार का सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है.
यहां तक पहुंचने में मेरे माता-पिता, पति और सास-ससुर का बहुत बड़ा योगदान रहा है. यदि परिवार का साथ नहीं होता, तो यहां तक पहुंचना शायद संभव नहीं हो पाता. आज मेरे सिर पर मिसेज इंडिया का यह ताज नहीं होता.ष् -डॉ. अपूर्वा वर्मा, मिसेज इंडिया विजेता
ब्रेन ऑफ ब्यूटी का सबटाइटल जीताः गुजरात के अहमदाबाद में 11 अप्रैल को श्मिसेज इंडियाश् प्रतियोगिता का शानदार आयोजन किया गया था. इस स्पर्धा में देशभर के अलग-अलग राज्यों से कुल 22 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी. डॉ. अपूर्वा ने इस प्रतियोगिता के विभिन्न कठिन राउंड्स को सफलतापूर्वक पार करते हुए श्ब्रेन ऑफ ब्यूटीश् का प्रतिष्ठित सबटाइटल अपने नाम किया.
छठ पूजा और चुनरी साड़ी ने दिलाया ताजः ट्रेडिशनल राउंड के दौरान अपूर्वा ने पूरी तरह से बिहार की गौरवशाली संस्कृति को आत्मसात किया. बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति और आस्था का महापर्व छठ पूजा के स्वरूप को मंच पर पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत किया. जब वे आरा की प्रसिद्ध श्चुनरी साड़ीश् पहनकर रैंप वॉक के लिए उतरीं, तो जूरी पैनल में बैठे सभी निर्णायक उनकी सादगी और प्रस्तुति देखकर मंत्रमुग्ध हो गए. फाइनल राउंड के संपन्न होने के बाद जब विजेता के नाम की घोषणा हुई, तो डॉ. अपूर्वा का नाम गूंज उठा और अंततः मिसेज इंडिया का गौरवमयी ताज अपूर्वा के सिर पर सज गया.
आरा जैसे छोटे शहर में जन्म लेकर इतना बड़ा सपना देखना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन मैंने हमेशा यह अटूट विश्वास रखा कि सच्ची कोशिश और कड़ी मेहनत की बदौलत कोई भी सपना इंसान से दूर नहीं रहता है. यही सकारात्मक सोच मुझे हर कठिन दौर में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करती रही.ष् -डॉ. अपूर्वा वर्मा, मिसेज इंडिया विजेता
मिसेज बिहार 2025 भी रहींः इससे पूर्व डॉ. अपूर्वा मिसेज बिहार 2025 का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं. वे लगातार महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं. मीडिया से विशेष बातचीत के दौरान अपूर्वा ने बताया कि यदि हम खुली आंखों से सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने का संकल्प लेते हैं, तो वे सपने अवश्य सच होते हैं. पेश हैं उस बातचीत के प्रमुख अंश-
यहां तक पहुंचने में चुनौतियां कितनी रहीं?
चुनौतियां तो बहुत अधिक थीं, लेकिन मेरे पास एक मजबूत आत्मविश्वास और आप सभी का स्नेहपूर्ण साथ था. मुझे खुद पर यह पूरा भरोसा था कि मुझे लोगों के इस विश्वास को खाली नहीं जाने देना है. अंततः लोगों का यही भरोसा और प्यार काम आया और मिसेज इंडिया का यह गौरवशाली क्राउन बिहार आ गया।
कंपटीशन कितना रहा और जूरी का क्या रिएक्शन रहा?
राष्ट्रीय स्तर पर कंपटीशन बहुत ज्यादा रहता है. प्रतियोगिता में कुल 22 प्रतिभागी शामिल थीं, जो देश के अलग-अलग राज्यों से आई हुई थीं और कोई भी किसी से कम नहीं थी. जूरी का पैनल जो स्कोरिंग करता है, वह ओवरऑल प्रदर्शन पर आधारित होता है. आपके बात करने का तरीका, बैठने का ढंग और चलने का तरीका, इन सभी बारीकियों को बहुत करीब से देखा और परखा जाता है. सभी प्रतिभागियों को एक सबटाइटल मिलता है. जिसमें मुझे श्ब्यूटी ऑफ ब्रेनश् का सबटाइटल प्राप्त हुआ. इसके बाद जब फाइनल मिसेज इंडिया की घोषणा हुई, तो उसमें मेरा नाम आया।
बिहार की लड़कियों को क्या मैसेज देंगी?
इट्स नेवर टू लेट… यानी कभी भी बहुत देर नहीं होती. सपने देखना कभी भी नहीं छोड़ना चाहिए, लेकिन यदि आप कोई सपना देखते हैं, तो उसे पूरा करने की हिम्मत भी आपके अंदर होनी चाहिए. एक महिला या फिर एक लड़की के तौर पर हमें कई सारी समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन समस्याओं के डर से अपने सपनों को छोड़ने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. हमेशा बंद आंखों से नहीं, बल्कि खुली आंखों से सपने देखने चाहिए और उन्हें हकीकत में बदलने का प्रयास करना चाहिए।
आजकल सोशल मीडिया पर अश्लीलता की भरमार है, लोग उसे ही मॉडल मानते हैं?
मॉडलिंग एक बिल्कुल अलग चीज है. यदि आप ई-कॉमर्स के क्षेत्र में जैसे कि ट्रेडिशनल, एथनिक, वेस्टर्न, नेशनल और इंटरनेशनल शूट कर रहे हैं, तो यह एक अलग विषय है. इन सबकी मॉडलिंग के तरीके अलग-अलग होते हैं. अश्लीलता को मैंने व्यक्तिगत तौर पर कभी भी प्रमोट नहीं किया है. मैं पिछले एक साल से इस फील्ड में सक्रिय हूं और मुझे कई बार इस तरह के शूट के लिए ऑफर भी आए हैं, लेकिन मैंने उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया. मेरा यह स्पष्ट मानना है कि महज चंद पैसों के लिए अपनी छवि खराब नहीं करनी चाहिए. यदि आपके अंदर वास्तविक टैलेंट है, तो एक ना एक दिन मुकाम जरूर हासिल होगा।

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