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नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने पर फैसला सुरक्षित - Nand Kesari || Top News || Latest News

नेशनल हेराल्ड केस: सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली। दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने पर फैसला सुरक्षित रख लिया. स्पेशल जज विशाल गोगने ने अब 29 नवंबर को फैसला सुनाने का आदेश दिया है।
दरअसल, शुक्रवार को ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट की ओर से पूछे गए सवालों पर स्पष्टीकरण दिया. सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एसवी राजू के अलावा जोहेब हुसैन, स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर एनके माटा, ईडी के एडिशनल डायरेक्टर दिनेश परुचारी, ईडी के डिप्टी डायरेक्टर नवीन राणा और ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर शिव कुमार गुप्ता उपस्थित थे
कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से 4 जुलाई 2014 को ईडी के पास दर्ज कराई गयी शिकायत की प्रति और 30 जून 2021 के एक दस्तावेज के बारे में पूछताछ की. तब ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा कि वो ये दोनों दस्तावेज कोर्ट में दाखिल कर देंगे, उसके बाद कोर्ट ने सुनवाई 6 सितंबर तक के लिए टाल दिया. इससे पहले कोर्ट ने 18 अगस्त को ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर शिव कुमार गुप्ता की मौजूदगी में दस्तावेजों का परीक्षण किया था.
वहीं, 7 अगस्त को कोर्ट ने जांच अधिकारी से पूछा था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी का इस मामले से क्या लेना-देना है. इससे पहले कोर्ट ने 14 जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले में सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी को जिन लोगों ने दान दिया उनके साथ धोखाधड़ी की गई. कुछ दानदाताओं को टिकट भी दिए गए. राजू ने गांधी परिवार की उस दलील का विरोध किया कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था. उन्होंने कहा कि एजेएल ही मूल रुप से नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक थी।
इस मामले में 5 जुलाई को लोकसभा में विपक्ष और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आरएस चीमा ने कहा था कि कांग्रेस ने एजेएल को बेचने की कोशिश नहीं की थी बल्कि वो इस संस्था को बचाना चाहती थी, क्योंकि वो स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थी. चीमा ने कहा था कि ईडी एजेएल का मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन क्यों नहीं दिखा रही है. एजेएल की स्थापना जवाहर लाल नेहरु, जेबी कृपलानी, रफी अहमद किदवई और दूसरे कांग्रेस नेताओं ने 1937 में की थी. चीमा ने कहा था कि एजेएल के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएएशन में कहा गया है कि उसकी सभी नीतियां कांग्रेस की होगी।
बता दें कि 4 जुलाई को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि ईडी ने एक आश्चर्यजनक और अप्रत्याशित मामला बनाया. उन्होंने कहा था कि ईडी ने आश्चर्यजनक से भी ज्यादा मामला बनाया है. ये मनी लांड्रिंग का ऐसा मामला है जिसमें संपत्ति का कोई जिक्र नहीं है. सिंघवी ने कहा था कि यंग इंडियन ने पूरी कार्रवाई एसोसिएटेड जनरल लिमिटेड को कर्ज मुक्त करने के लिए किया. उन्होंने कहा था कि हर कंपनी अपने को कर्ज मुक्त करने के लिए कानून के मुताबिक कदम उठाती है. कंपनियां अपने को कर्ज मुक्त करने के लिए दूसरी कंपनी को दे देती हैं. उन्होंने कहा था कि यंग इंडियन लाभ कमाने वाली कंपनी नहीं है. सिंघवी ने कहा था कि ईडी ने सालों तक कुछ नहीं किया और किसी निजी शिकायत को आधार बनाकर कार्रवाई शुरु की.
ईडी ने पूरी की दलीलें: ईडी की ओर से 3 जुलाई को दलीलें पूरी कर ली गयी थी. ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि यंग इंडियन दो हजार करोड़ रुपये की आपराधिक आय प्राप्त करने का एक साधन था और यह मनी लांड्रिंग का एक क्लासिक मामला है. ईडी ने कहा था कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी कांग्रेस को नियंत्रित करते हैं, उनका उद्देश्य 92 करोड़ प्राप्त करना नहीं था, बल्कि उनका उद्देश्य दो हजार करोड़ रुपये प्राप्त करना था. ईडी ने कहा था सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने दो हजार करोड़ की संपत्ति के लिए मात्र 50 लाख रुपये ही दिए. ईडी ने कहा था कि एसोसिएटेड जनरल्स लिमिटेड का स्वामित्व लेने के बाद गांधी परिवार के नियंत्रण वाली यंग इंडियन लिमिटेड ने घोषणा की कि वो नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन नहीं करेगा.
2 मई को कोर्ट ने जारी किया था नोटिस: कोर्ट ने 2 मई को इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी समेत सात आरोपियों को नोटिस जारी किया था. ईडी ने 15 अप्रैल को कोर्ट में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. ईडी ने इस मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सैम पित्रोदा को आरोपी बनाया है. ईडी ने मनी लांड्रिंग कानून की धारा 44 और 45 के तहत शिकायत दाखिल किया है।

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