लखनऊ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े कथित दोहरी नागरिकता मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने ही पहले दिए गए एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा कि बिना आरोपी को नोटिस दिए एफआईआर का आदेश देना उचित नहीं. न्यायमूर्ति ने माना कि श्प्राकृतिक न्यायश् के सिद्धांत के तहत किसी भी व्यक्ति को पहले अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए.
दरअसल, एक याचिका पर पहले कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में यह पाया गया कि प्रस्तावित आरोपी को सुने बिना ऐसा आदेश देना प्रक्रिया के खिलाफ है. अब अदालत ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करने का फैसला किया है और मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की है.
बता दें कि संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर एस. विग्नेश शिशिर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिकाकर्ता ने लखनऊ के एमपी/एमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती दी. याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता को लेकर कार्यवाही की मांग की. इससे पहले याचिकाकर्ता ने एमपी/एमएलए कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. इसकी सुनवाई करते हुए लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट ने 28 जनवरी 2026 को याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया था.
इसके बाद याचिकाकर्ता ने 12 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में अपील की. 17 फरवरी को हाईकोर्ट ने शिशिर की याचिका को स्वीकार कर लिया था. याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए ब्रिटिश नागरिकता को लेकर राहुल गांधी के खिलाफ रायबरेली के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी. लखनऊ की एमपी/एमएलए कोर्ट में दाखिल याचिका को न्यायाधीश ने खारिज कर दिया था. विशेष न्यायाधीश तृतीय एसीजीएम आलोक वर्मा ने नागरिकता को लेकर अपना फैसला सुनाया था।
राहुल गांधी पर एफआईआर के आदेश पर रोक, बिना नोटिस कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत माना
