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नेपाल हिंसा का बिहार पर असर, 100 साल पुरानी सूतापट्टी कपड़ा मंडी में सन्नाटा पसरा - Nand Kesari || Top News || Latest News

नेपाल हिंसा का बिहार पर असर, 100 साल पुरानी सूतापट्टी कपड़ा मंडी में सन्नाटा पसरा

मुजफ्फरपुर। नेपाल में हिंसा के कारण बिहार में कारोबार प्रभावित हो रहा है. मुजफ्फरपुर सुतापट्टी से हर साल 400 करोड़ का कपड़ा नेपाल भेजा जाता है. इस्लामपुर से हर साल 100 से 150 करोड़ की लहठी नेपाल भेजी जाती है, लेकिन इसबार बॉर्डर सील होने के कारण कारोबार नहीं हो रहा.
दुर्गा पूजा के बावजूद मंडी में सन्नाटारू व्यपारियों के अनुसार खासकर दुर्गा पूजा में यहां से अच्छा खासा व्यापार होता है. लेकिन इसबार नेपाल में हो रही हिंसा के कारण मंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है. ईटीवी भारत ने ग्राउंड पर व्यापारियों से बात की. व्यापारी काफी चिंतित नजर आए.
मंडी में 750 से अधिक दुकानें
शहर के महाराजा अग्रसेन मार्ग स्थित यह मंडी है, जिसकी स्थापना 1915 के आसपास हुई थी. उस समय 15 दुकानें थीं, लेकिन अब 750 से अधिक दुकानें हैं. इसके अलावा ज्वेलरी के भी सैंकड़ों शोरूम है. मुजफ्फरपुर का सूतापट्टी सरकार को राजस्व देने वाला कपड़े का सबसे बड़ा बाजार है. बिहार, बंगाल और नेपाल के कारोबारी होलसेल कपड़े की खरीदारी करते हैं.
आंदोलन के कारण कारोबार ठप
नेपाल में हिंसा के कारण बॉर्डर पूरी तरह सील है. जिस कारण व्यापारी यहां तक नहीं पहुंच रहे हैं. सुतापट्टी के थोक व्यापारी ऋषि अग्रवाल बताते हैं कि नेपाल से दशहरा के समय कपड़ा का कारोबार का मेन सीजन होता है, लेकिन आंदोलन की वजह से व्यापारी आ ही नहीं रहे हैं.
पिछले साल 400 करोड़ का कारोबार
व्यापारी मूलचंद कहते हैं, कि नेपाल से सबसे ज्यादा ग्राहक हमारे यहां आते थे. इस कारण माल गोदामों में जाम पड़ा हुआ है. इस साल सूतापट्टी मंडी के व्यापारियों को करीब तीन सौ करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ सकता है. जबकि पूरे साल का सबसे बड़ा सीजन दशहरा होता है. पिछले साल 400 करोड़ के आसपास का कारोबार हुआ था।

सारे ऑर्डर कैंसिल
व्यापारी बताते हैं कि नेपाल में आंदोलन के दौरान हिंसा बढ़ गई है. मेरे रिश्तेदारों के घर और होटल तक जला दिए गए. लोग छुपकर रह रहे हैं. खाने तक की परेशानी है. कल तक जो लोग हवाई जहाज से चलते थे, आज सड़क पर आ गए हैं. हमारे यहां से जो कारोबारी कपड़े खरीदते थे, उन्होंने सारे ऑर्डर कैंसल कर दिए हैं।
राजस्थान मारवाड़ी समुदाय ने मंडी स्थापित की: जानकार बताते हैं कि यह मंडी काफी पुरानी है. यह ऐतिहासिक दृष्टि से भी खास महत्व रखता है. बताया जाता है कि राजस्थान से आए मारवाड़ी समुदाय के लोगों ने इसकी नींव रखी थी.
कपड़ा मंडी सुतापट्टी
कभी भारत में तीसरे नंबर पर था सुतापट्टीरू उस वक्त कपड़ा घोड़ों और गधा पर लादकर आसपास के इलाकों में बेचा जाता था. धीरे-धीरे यह मंडी विकसित होती गई और आज उत्तर बिहार की सबसे बड़ी मंडी है. सूरत मंडी के स्थापित होने से पहले सूतापट्टी का स्थान पूरे भारत में व्यावसायिक दृष्टिकोण से तीसरे नंबर पर आता था.
100 करोड़ का लहठी कारोबार
सुतापट्टी के बगल में इस्लामपुर इलाका आता है, जहां लहठी का कारोबार होता है. मुजफ्फरपुर की लहठी पूरे देश में मशहूर है. नेपाल तक लहठी का व्यापार भी अच्छा है. बाबा लहठी भंडार के संचालक रियाज अहमद ने बताया कि नेपाल से कारोबारी लहठी खरीदने मुजफ्फरपुर के इस्लामपुर में सालों भर आते रहते हैं. खासकर दुर्गा पूजा यानी नवरात्र के समय नेपाल में लहठी की डिमांड रहती है.
क्या है मामला
बता दें कि नेपाल में सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर बैन लगाने के खिलाफ युवा उग्र हो गए. सोमवार 8 सितंबर से शुरू हुए इस हिंसा में करीब 34 लोगों की मौत हो गयी है. युवाओं के प्रदर्शन के बाद सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन के फैसले को वापस लिया. हालांकि अभी भी इलाके में कर्फ्य लगा है. धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं।

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