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राजस्थान में गेहूं पर 150 रुपये बोनस तो मध्य प्रदेश में 15 रुपये क्यों, कांग्रेस ने मोहन यादव को लिखा पत्र - Nand Kesari || Top News || Latest News

राजस्थान में गेहूं पर 150 रुपये बोनस तो मध्य प्रदेश में 15 रुपये क्यों, कांग्रेस ने मोहन यादव को लिखा पत्र

जीतू पटवारी ने उठाए सवाल, मुकेश नायक ने भी टेंडर में बड़ी गड़बड़ी के लगाए आरोप
भोपाल । कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने गेहूं के समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा दिए जा रहे 15 रुपए को बोनस को लेकर सवाल उठाए हैं. जीतू पटवारी ने सवाल उठाया कि सरकार ने पिछले साल 175 रुपए का बोनस दिया था, लेकिन इस साल सिर्फ 15 रुपए का बोनस क्यों दिया जा रहा है? उधर कांग्रेस ने प्रदेश के जल संसाधन विभाग में टेंडर के नाम पर बड़ी गड़बड़ी के सरकार पर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने आरोप लगाया है कि 300 करोड़ से ऊपर के टेंडरों में बिचौलिया तंत्र के जरिए उच्च स्तर पर कमीशन तय किया जा रहा है.
सरकार सिर्फ 15 रुपए का क्यों दे रही बोनस!
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा,पिछले साल केन्द्र सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2425 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया था. इस पर राज्य सरकार द्वारा 175 रुपए का बोनस दिया गया. इस तरह प्रदेश में 2600 रुपए क्विंटल गेहूं खरीदा गया था. इस साल केन्द्र सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपए घोषित किया है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा बोनस सिर्फ 15 रुपए घोषित किया गया है. यदि राज्य सरकार पिछले साल की तरह गेहूं पर 175 रुपए का बोनस दे देती तो किसानों को 2700 रुपए प्रति क्विंटल के दाम मिल जाते, जैसा संकल्प पत्र में वादा किया था।
राजस्थान में गेहूं पर 150रु का बोनस
जीतू पटवारी ने कहा, पड़ोसी राज्य राजस्थान 150 रुपए का बोनस किसानों को दे रहा है. जबकि मध्यप्रदेश सरकार सिर्फ 15 रुपए का बोनस देकर किसानों से धोखा कर रही है.जीतू पटवारी ने सरकार से मांग की है कि राज्य सरकार तत्काल खरीदी केन्द्रों की सूची जारी करे और समर्थन मूल्य को बढ़ाया जाए।
कांग्रेस ने टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल
उधर कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग में बड़े टेंडर परसेंटेज पर तय किए जा रहे हैं, यही वजह है कि पिछले डेढ़ सालों से विभाग में बड़े नए टेंडर नहीं हो सके हैं. इसके अलावा बाकी टेंडर में कुछ कंपनियों के साथ अधिकारियों का गठजोड़ बन गया है।
मुकेश नायक ने कहा, कांग्रेस सरकार द्वारा जिस एक कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया गया था, वह अलग-अलग नामों से न सिर्फ टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले रही है, बल्कि खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, डिंडेरी, हरदा, सीहोर आदि जिलों में गिनी चुनी कंपनियां ही बार-बार टेंडर में लोएस्ट आ रही हैं. कांग्रेस ने 2023-24 के सभी टेंडरों की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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