एमपी सरकार के साथ वार्ता फेल, अब 18 अप्रैल को भोपाल में होगा शिक्षकों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन

टीईटी परीक्षा और वरिष्ठता के मुद्दे पर सरकार और शिक्षकों के बींच फंसा पेंच
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों का असंतोष बढ़ता जा रहा है. टीईटी परीक्षा और वरिष्ठता जैसे अहम मुद्दों को लेकर शिक्षण संगठन और सरकार के साथ हुई वार्ता बेनतीजा रहने के बाद संयुक्त मोर्चा ने खुली चेतावनी दे दी है. 18 अप्रैल को भोपाल में मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा और धरना प्रदर्शन के जरिए हजारों शिक्षक अपनी एकजुटता दिखाएंगे. संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह आंदोलन अब सिर्फ मांगों का नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई बनता जा रहा है.
वार्ता विफल, नहीं निकला कोई ठोस समाधान
बता दें कि अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा और शासन के बीच हुई बातचीत से कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकल सका. जबकि इसको लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण विभाग के अधिकारियों के साथ दो चरणों में चर्चा हुई, लेकिन टीईटी परीक्षा आदेश निरस्त करने और नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता तय करने जैसी प्रमुख मांगों पर सरकार ने कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया.
टीईटी और वरिष्ठता बना सबसे बड़ा विवाद
सयुंक्त मोर्चा की ओर से 2 मार्च को जारी टीईटी परीक्षा आदेश को खत्म करने और सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति से करने की मांग उठाई गई. हालांकि शासन ने केवल पुनर्विचार याचिका पर विचार करने और विधि विशेषज्ञों से सलाह लेने की बात कही, लेकिन समय-सीमा तय नहीं की गई. इससे शिक्षक वर्ग में नाराजगी और बढ़ गई है।
18 अप्रैल को अनुरोध यात्रा और धरना तय
संयुक्त मोर्चा के उपेंद्र कौशल का कहना है कि ष्अब आंदोलन टलेगा नहीं. 18 अप्रैल को भेल भोपाल के जंबूरी मैदान में सुबह 11 बजे से मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा और धरना प्रदर्शन आयोजित होगा. इसमें प्रदेशभर से शिक्षक, कर्मचारी और पेंशनर्स इसमें शामिल होकर अपनी ताकत दिखाएंगे.ष् बता दें कि मोर्चा के पदाधिकारियों ने सभी संगठनों और साथियों से व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की है. उनका कहना है कि यह समय शिक्षक समाज के हित में निर्णायक भूमिका निभाने का है. अगर अब भी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन और उग्र हो सकता है।

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