एमपी: 3 साल से अटकी शिक्षक भर्ती पर युवाओं का टूट रहा है धैर्य, दी आखिरी चेतावनी

वेटिंग अभ्यर्थी संघ के सदस्यों ने की सीएम मोहन यादव से मुलाकात
भोपाल। उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 की लगातार देरी ने लाखों अभ्यर्थियों के धैर्य की सीमा को तोड़ दिया है. अब युवा सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है. बता दें कि जनवरी 2026 तक भर्ती प्रक्रिया को पूरे किए हुए 3 साल पूरे हो चुके हैं. लेकिन वेटिंग अभ्यर्थियों को अब तक नौकरी नहीं मिली।
इसलिए हो रही भर्ती में देरी
भर्ती में देरी का मुख्य कारण आयु सीमा से जुड़े कोर्ट केस को बताया जा रहा है. जबकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच पहले ही अभ्यर्थियों के पक्ष में निर्णय दे चुकी है. इसके बावजूद मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और स्टेटस को के चलते प्रक्रिया ठप पड़ी है. कोर्ट में बार-बार सुनवाई के बावजूद प्रगति न होना अभ्यर्थियों के बीच संदेह और नाराजगी को बढ़ा रहा है.
बातचीत में समर्थन का दावा
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पदवृद्धि के साथ सेकंड काउंसलिंग का समर्थन किया है. लेकिन अब तक यह समर्थन सिर्फ बयानों तक ही सीमित नजर आता है. अभ्यर्थियों का कहना है कि समस्या का समाधान प्रशासनिक इच्छाशक्ति से संभव है, लेकिन वह नजर नहीं आ रहा. वहीं, भर्ती प्रक्रिया में देरी का असर सिर्फ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है. सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है. बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे भी इस स्थिति की झलक दिखाते हैं.
आखिरी चेतावनी, अभी या कभी नहीं
लंबे समय से संघर्ष कर रहे वेटिंग अभ्यर्थी संघ के अध्यक्ष मनोज दंडोतिया ने बताया कि ष्अब अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे रहा है. उनका कहना है कि वे हर चरण के लिए लड़ते-लड़ते थक चुके हैं. भर्ती निकलवाने से लेकर परीक्षा, परिणाम और पहली काउंसलिंग तक. अब द्वितीय काउंसलिंग और जाइनिंग को लेकर और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दंडोतिया के अनुसार यदि हमें जल्द अधिकार नहीं मिलते तो फिर बाद में मिलना मुश्किल हो जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *