न्यूयॉर्क। भारत और ऑस्ट्रिया के स्थायी दूतावासों ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र ध्वज के तहत सर्वाेच्च बलिदान देने वाले लगभग 4,000 शांति सैनिकों, जिनमें 184 भारतीय भी शामिल थे, को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक समारोह का आयोजन किया।
पिछले एक वर्ष में इस नेक कार्य में 45 वर्दीधारी शांति सैनिकों ने अपनी जान गंवाई. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने एक पोस्ट में कहा, ष्आज, संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों के अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, भारत और ऑस्ट्रिया के स्थायी दूतावास न्यूयॉर्क स्थित भारत के स्थायी दूतावास में एक गंभीर श्रद्धांजलि सभा का संयुक्त रूप से आयोजन कर रहे हैं. हम संयुक्त राष्ट्र ध्वज के तहत सर्वाेच्च बलिदान देने वाले लगभग 4,000 बहादुर शांति सैनिकों, जिनमें 184 भारतीय भी शामिल हैं, को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. विशेष रूप से पिछले एक वर्ष में इस नेक कार्य में अपनी जान गंवाने वाले 45 वर्दीधारी शांति सैनिकों को याद करते हैं. शांति के प्रति उनके साहस और समर्पण को कभी नहीं भुलाया जा सकता. हम उन्हें कभी न भूलें.ष्
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने कहा, ष्भारत, 1948 से एक गौरवशाली भागीदार के रूप में, 50 से अधिक संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में लगभग 3 लाख सैनिकों को तैनात कर चुका है. अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की रक्षा में 184 भारतीय शांति सैनिकों ने सर्वाेच्च बलिदान दिया।
भारत में संयुक्त राष्ट्र ने भी इस अवसर पर मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 के सर्वश्रेष्ठ सैन्य लैंगिक अधिकार पैरोकार पुरस्कार से सम्मानित किया. वह लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल में कार्यरत हैं. भारत की मेजर अभिलाषा बराक को लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए वर्ष 2025 का मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर नामित किया गया है. मेजर बराक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल में कार्यरत हैं और पहली महिला लड़ाकू अधिकारी हैं.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, जेंडर-संवेदनशील शांति रक्षा को बढ़ावा देने में उनके उत्कृट नेतृत्व को मान्यता देते हुए, भारत की मेजर अभिलाषा बराक को वर्ष 2025 का मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर नामित किया गया है. मेजर बराक लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल में कार्यरत हैं और भारतीय सेना की पहली महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट हैं. एक फ्रंटलाइन कमांडर के रूप में उन्होंने व्यापक स्तर पर प्रयास किए हैं, जिसमें व्यावसायिक प्रशिक्षण, शिक्षा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से 5000 से अधिक महिलाओं और लड़कियों को शामिल किया गया है. यह सशक्तिकरण और संघर्ष के बाद के पुनर्वास में सहायक है. संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षकों के इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, हम उनकी सेवा का सम्मान करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने सर्वाेच्च बलिदान देने वाले लगभग 4,000 शांति सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की
