इससे पहले टिकट कटने पर समर्थकों ने काटा था बवाल
दतिया। डॉ नरोत्तम मिश्रा का सब्र आखिर जवाब दे ही गया. जिस दतिया में उपचुनाव के सहारे अपनी सियासत का कमबैक देख रहे और चुनाव के ऐलान से पहले प्रचार में जुट गए थे. उसी दतिया में बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के नाम से वोट मांगने की बात कहते हुए नरोत्तम मिश्रा रो पड़े. सार्वजनिक जीवन की मर्यादाएं जानते हैं, लिहाजा जुबान नहीं फिसली, लेकिन शब्द और भाव के बीच आंसू लकीर खींच गए थे. दमदार दबंग नरोत्तम को बिफरते तो दतिया ने खूब देखा है. बिखरते पहली बार देखा था, बोलते-बोलते रो पड़े नरोत्तम ने खुदको संभाला भी नहीं बल्कि भाषण वहीं खत्म किया और अपनी कुर्सी पर लौट गए.
ऐसा क्या जुबान पर आया कि आंसू नहीं रोक पाए नरोत्तम
नरोत्तम मिश्रा ने बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवार आशुतोष तिवारी का नामांकन अपने हाथों से भरवाया. चुनावी सभा में आशुतोष को अपने साथ खड़ा रख कर ये संदेश भी दिया कि तीन दिन में कहानी बदल गई है. जैसे कोई कारवा गुजर जाने के बाद का गुबार देखते खड़ा हो. मंच पर अपनी बारी आने पर भाषण दे रहे नरोत्तम बता रहे थे कि दतिया का हर कार्यकर्ता आशुतोष तिवारी के साथ खड़ा होगा. कोई घर नहीं बैठेगा. नरोत्तम मिश्रा बोले ष्मैं आपको सच बता रहा हूं कि दतिया को पार्टी ने बहुत दिया है.
सभा को संबोधित करते वक्त रो पड़े नरोत्तम
30 साल तक जो पार्टी विधायक बना कर रखेगी. जो पार्टी 15 साल तक मंत्री बनाकर रखेगी और पार्टी से क्या चाहिए. रात दिन भाजपा की सेवा करके. मनसा वाचा कर्मणा, एक एक कार्यकर्ता प्राण झोंक देगा. आशुतोष भैय्या के लिए प्राण लगा देगा. ये भ्रम या मुगालते में कोई ना रहे कि कोई कार्यकर्ता घर बैठेगा. 16 तारीख से यहीं डेरा जमाएंगे. इतना कहने के बाद नरोत्तम मिश्रा भावुक हो गए. उन्होंने कहा सारे कार्यकर्ताओं के साथ दतिया के एक-एक दरवाजे पर अपना शीष नवाऊंगा और फिर लगभग बिलखते हुए बोले एक- एक गांव के अंदर जाऊंगा और आशुतोष को जिताऊंगा.ष् फिर उनसे भाषण नहीं दिया गया और वे अपनी कुर्सी पर लौट गए.
नरोत्तम का सवाल, फूट हम में है तो तुम्हाए चाचा क्यों नहीं आए
सभा को संबोधित करते हुए नरोत्त मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि हम अपने काम बता रहे हैं, तुम अपने बताओ. कांग्रेस काम तो बताएगी नहीं, बस यह कह रही है कि बीजेपी में बहुत अंर्तविरोध है. तुम बताओ अवधेश नायक क्यों नहीं गए तुम्हारा फार्म भरवाने. फूट अगर हम में है, तो हम तो छाती अड़ाए खड़े हैं. आशुतोष को जिताने भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता खड़ा है. तुम बताओ तुम्हारे चाचा कहां है. चाचा नहीं गए तो कोई बात नहीं राजेन्द्र भारती क्यों नहीं गए. वहां भारती नहीं जा रहे, अवधेश नहीं जा रहे. बता हमें रहे हैं कि फूट भाजपा में है.
नाम कहीं ना हो , फिर भी पार्टी का काम करूंगा
डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बीते 72 घंटों में दतिया से लेकर भोपाल और दिल्ली में शीर्ष नेताओं की मेल मुलाकातों के पहले और बाद में खुद को साध रखा हो, लेकिन दिल का दर्द जुबां पर आ रहा है. वो ना केवल भाषण में सुनाई दिया. मीडिया से बातचीत में भी वे कह गये है कि मेरा नाम कहीं भी ना शामिल होगा. फिर भी मैं पार्टी का नाम करता रहूंगा. प्रचार में जुटा रहूंगा. इसके पहले मीडिया ने उनसे जब उस चर्चित शेर के बारे में पूछा था कि मेरा पानी उतरता देखकर किनारे घर मत बना लेना मैं समन्दर हूं फिर लौटकर आऊंगा. तब नरोत्तम ने कहा कि कोई किनारे घर बना ले क्या फर्क पड़ता है.
15 दिन का उपचनाव , 30 को वोटिंग, 3 अगस्त को नतीजे
दतिया उपचुनाव के नतीजे 3 अगस्त को आ जाएंगे. 30 जुलाई को यहां वोटिंग होगी. बीजेपी ने जहां नरोत्तम मिश्रा का पत्ता काटकर आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है. वहीं कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मदैान में उतारा है. दतिया विधानसभा का ये उपचुनाव कांग्रेस के विधायक रहे राजेन्द्र भारती का निर्वाचन धोखाधड़ी के एक मामले में दोषसिध्दि के बाद शून्य कर दिया गया था. जिसके बाद यहां पर उपचुनाव हो रहा है।
