रायसेन। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को मध्य प्रदेश पहुंचे. जहां रायसेन के ग्राम रायपुर रामासिया से श्खेत बचाओ, मिट्टी बचाओश् अभियान का राष्ट्रीय स्तर पर आगाज किया. यह महत्वपूर्ण अभियान 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में संचालित किया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने बताया इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी गांव में जाकर अपने खेत को संतुलित खाद कैसे दें, इसकी चर्चा करेंगे.
किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज ने सबसे पहले दीप प्रज्वलित कर और कन्या पूजन के साथ अभियान की शुरुआत की. मंच से ग्रामीणों और किसानों को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ष्मिट्टी की सेहत बचाना वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया और रासायनिक खाद के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग के प्रति आगाह किया.
आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को बचाना जरूरी
शिवराज सिंह ने कहा कि अत्याधिक खाद और असंतुलित खाद कई बार धरती माता को बहुत नुकसान पहुंचाती है. सही तरीके और तत्वों के साथ खाद डलेगी तो धरती की सेहत भी खराब नहीं होगी और किसानों की फसल भी अच्छी होगी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि धरती माता सिर्फ हमारे लिए ही नहीं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बहुत जरूरी है. वरना ऐसा न हो कि आने वाले समय में धरती माता अन्न उत्पादित करना ही बंद कर दे. इसके लिए इस अभियान के जरिए धरती के आवश्यक तत्वों के मुताबिक संतुलित खाद के उपयोग करने की बात हम करेंगे.
नकली पेस्टिसाइड के खिलाफ चलेगा अभियान
इसके साथ ही नकली पेस्टीसाइड के खिलाफ भी अभियान चलेगा. इस दौरान किसानों को एग्रो क्लाइमेट कंडीशन के मुताबिक कौन से बीज और कौन सी फसल सही रहेगी, ये सब बताएंगे. साथ ही किसानों को हरित खाद के बारे में भी बताएंगे. केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ भी दिया जाएगा.ष्
फसलों के सर्वे में अब नहीं होगी गड़बड़ी, केंद्रीय मंत्री शिवराज का नया प्लान
संतुलित खाद का उपयोगः केंद्रीय मंत्री ने किसानों से आग्रह किया कि वे मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही संतुलित खाद का उपयोग करें, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और लागत कम हो.
स्वॉयल हेल्थ कार्डः उन्होंने सभी किसानों से अपने खेतों का स्वॉयल हेल्थ कार्ड (मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड) बनवाने की अपील की, ताकि मिट्टी की पोषक तत्वों की जानकारी के आधार पर खेती की जा सके।
