ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा क्षेत्रों में अहम समझौते,जहाज निर्माण और विमानन क्षेत्र में भी करेंगे सहयोग
नई दिल्ली । भारत और जापान ने गुरुवार को आर्थिक साझेदारी ढांचा एवं सैन्य उपकरणों को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए एक रक्षा समझौते समेत कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान की उनकी समकक्ष सनाए तकाइची के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद इन कदमों की घोषणा की गई.
इस बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए जिनमें आर्थिक सुरक्षा पर एक घोषणा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक संयुक्त वक्तव्य और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में सहयोग को मजबूत करने के वास्ते एक समझौता शामिल है.दोनों पक्षों ने जहाज निर्माण और विमानन के क्षेत्र में सहयोग को सुगम बनाने के लिए एक रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया.
प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया बयान में कहा, ‘‘आज के अनिश्चितता के दौर में भारत और जापान दोनों ही आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को बेहतर ढंग से समझते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए, हमने आज आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त खाका तैयार किया है.’’
मोदी ने कहा, ‘‘इसके माध्यम से हम सेमीकंडक्टर, प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्रियों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति शृंखला को अधिक सुदृढ़ और लचीला बनाएंगे.’’
मोदी ने कहा, ‘‘आज भारत और जापान दोनों दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं. एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र हमारा साझा प्राथमिक लक्ष्य है. इनके माध्यम से हम पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता और प्रगति का मार्ग संयुक्त रूप से प्रशस्त करेंगे.’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जापान ने ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘भारत-जापान बायोगैस पहल के माध्यम से हम भारत में एक हजार बायोगैस और जैविक उर्वरक संयंत्र स्थापित करेंगे. इससे भारत के गांवों में समृद्धि आएगी तथा ग्रामीण आजीविका को और मजबूती मिलेगी.’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने तेल संकट जैसी स्थितियों से निपटने के लिए ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित एक महत्वपूर्ण पहल भी की है.’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इसके अलावा बैटरियों, ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा सहयोग दुनिया के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में एक महत्वपूर्ण योगदान देगा.’’मोदी ने कहा कि भारत और जापान आर्थिक सुरक्षा को साझा सुरक्षा के रूप में देखते हैं और ऊर्जा परिवर्तन को एक साझा अवसर के रूप में मानते हैं.
द्विपक्षीय व्यापार में वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए व्यावसायिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनसे भारत में 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का जापानी निवेश होगा.मोदी ने कहा, ‘‘भारत और जापान की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं. सांस्कृतिक मूल्यों से लेकर आधुनिक तकनीक तक, हमारी सोच और दृष्टिकोण में भी समानताएं हैं.’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंधों की नींव अटूट पारस्परिक भरोसे पर टिकी है.’’ उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने आर्थिक सुरक्षा के लिए एक संयुक्त खाका तैयार किया है.मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में पहले संयुक्त विकास परियोजना के संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘नौसेना के रेडियो एंटेना के लिए यह परियोजना हमारे रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी में एक नया अध्याय खोलेगी. अब हम मिलकर रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे, जो क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करेंगी.’’दोनों पक्षों ने फार्मा, चिकित्सा उपकरण और जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भी समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
उन्होंने कहा, ‘‘इसके माध्यम से हम अब ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हासिल की गई सफलता की कहानी को जहाज निर्माण और विमानन जैसे क्षेत्रों में भी दोहराएंगे.’’दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार और निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत-जापान संबंधों की व्यापक समीक्षा की.
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारे संबंध अटूट पारस्परिक भरोसे पर आधारित हैं’’ जो दोनों देशों के बीच संबंधों में बढ़ते सामंजस्य को दर्शाता है.मोदी और तकाइची की मौजूदगी में आर्थिक सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तथा अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े प्रमुख समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ।
भारत, जापान ने संबंधों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों की घोषणा की
