धर्म का उद्देश्य मानवता की सेवा करना भी है : नारायण सिंह कुशवाह

धर्म का उद्देश्य मानवता की सेवा करना भी है : नारायण सिंह कुशवाह
ग्वालियर। महात्मा ज्योतिबा फुले जी ने सबसे पहले जो लड़ाई लड़ी वह बेटियों को पढ़ाने की थी। समाज को पहले पर्दा प्रथा, सती प्रथा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था और इसका सबसे बड़ा कारण मुगलों के आक्रमण के बाद बहू बेटियो के साथ अपमानित व्यवहार किए जाते थे जिससे बचने के लिए समाज में बेटियो को पर्दे में रखना , घर में रखना ,बाहर नहीं भेजना ऐसी सोच के साथ सुरक्षित रखने का काम किया जाता था फिर यह समाज में प्रथाएं बन गई लेकिन ज्योतिबा फुले जी ने महिलाओं के उत्थान के लिए उनको शिक्षित होना चाहिए उस पर कदम बढ़ाए सर्वप्रथम उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्री फुले को शिक्षित करने का प्रण लिया और जब उनकी पत्नी शिक्षित हुई। उन्होंने पहला स्कूल बनवाया जिसमें उनकी धर्मपत्नी शिक्षिका के रूप में हुई।
उन्होंने विधवा महिलाओं को भी पुनः विवाहित होने पर जोर दिया ताकि इन विधवाओं को नया जीवन और समाज में सम्मान मिल सके। फुले ने महिलाओं को समानता का दर्जा दिलाया।ज्योतिबा फुले ने गरीबों, महिलाओं, दलितों एवं पिछड़े वर्ग के उत्थान तथा सामाजिक जड़ताओं व कुरीतियों को दूर करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया।यह बात डॉ. रवि अम्बे ने गुरुवार को जेयू के गालव सभागार में नंदलाल बाल कल्याण समिति द्वारा आयोजित महात्मा ज्योतिबा राव फुले की पुण्यतिथि के अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता कही। विशिष्ट अतिथि के रूप में नबाव सिंह व जगत सिंह कौरव, मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह उपस्थित रहे। वहीं अध्यक्षता डॉ. गुलाब सिंह ने की।समिति के अध्यक्ष रूपेंद्र राजपूत,सचिव आनंद यादव, सह सचिव संजय सिंह ,उपाध्यक्ष बच्चन सिंह, कोषाध्यक्ष सुरेश सिंह सदस्य सुधा पलिया ने सभी अतिथियों को शॉल श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. संगीता कटारे ने कहा कि समाज में बदलाव लाने के लिए ज्योतिबा फुले जी ने कई कार्य किए उन्होंने शिक्षा पर भी जोर दिया उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्री फुले को शिक्षित बनाया ताकि समाज में महिलाओं को भी शिक्षित होने का मौका मिले। जब अंग्रेजों ने शिक्षा कमीशन बनाया तो अंग्रेजों ने भी ज्योतिबा फूले जी के शिक्षा के प्रति विचारों को कमीशन में डालने का काम किया। समाज में महिलाओं के प्रति जो अवधारणाएं थी उसको बदलने का कार्य भी ज्योतिबा फूले के द्वारा किया गया।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को समानता का दर्जा मिला।लोग शिक्षा को ही अपना मार्ग बनाएं।अंत में उन्होंने कहा कि महात्मा ज्योतिबा राव फुले ने समाज में शिक्षा की अलख जगाई थी।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. गुलाब सिंह ने कहा कि शिक्षित होने के बाद भी हम ज्योतिबा फुले व सावित्री फुले को भूल गए हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में उनको बहुत ज्ञान था। शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली समस्याओं को उन्होंने दूर किया। उन्होंने सारा जीवन सामाजिक सुधार में लगाया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि धर्म का उद्देश्य आत्मिक विकास ही नहीं,बल्कि मानवता की सेवा करना भी है। ज्योतिबा फुले सामाजिक शैक्षणिक क्रांति के प्रणेता,सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करने वाले महात्मा थे।कार्यक्रम के दौरान ज्योतिबा फुले पर आधारित नाटक ज्योतिबा फुले की जीवनगाथा का मंचन किया गया जिसमें उनके संघर्षों को दिखाया गया।इस अवसर पर ईसी मेंबर संजय सिंह यादव, प्रदीप शर्मा, विवेक सिंह भदौरिया, डॉ. हेमंत शर्मा, डॉ. शांतिदेव सिसोदिया, अतर सिंह जाटव,डॉ.विमलेंद्र सिंह राठौर,वीरेंद्र गुर्जर, राजेश कटारे, एडवोकेट राजेश सिंह गुर्जर,नर सिंह छारी,अर्जेन्द्र छावरिया आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुरेश यादव ने किया। वहीं समिति के संरक्षक मुख्तयार सिंह के आभार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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