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मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 15 दिनों तक टली, वकीलों ने मांगा समय - Nand Kesari || Top News || Latest News

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 15 दिनों तक टली, वकीलों ने मांगा समय

जबलपुर। अन्य पिछड़ा वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण के मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई एक बार फिर 15 दिनों के लिए टल गई. अनारक्षित वर्ग के वकील ने कहा कि एक दिन पहले ही उन्हें इस मामले से जुड़े हुए 15000 पन्ने दिए गए हैं. इतने जल्दी इनका अध्ययन नहीं किया जा सकता. इसलिए हमें समय दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को तय की है.
अनारक्षित वर्ग के वकील ने मांगा 2 हफ्ते का समय
24 सितंबर यानि आज से इस मामले की लगातार सुनवाई होनी थी. आज सुप्रीम कोर्ट में इस मामले से जुड़े हुए सभी वकील इकट्ठा हुए. ओबीसी महासभा की ओर से सीनियर एडवोकेट रामेश्वर पटेल भी इस याचिका की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. एडवोकेट रामेश्वर पटेल ने बताया कि ष्इसके पहले की सुनवाई शुरू होती अनारक्षित वर्ग की ओर से वकालत करने वाले वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले के 15000 पेपर कल शाम ही प्राप्त हुए हैं और बिना पढ़े इन पर बहस नहीं की जा सकती. इसलिए उन्हें कम से कम 2 सप्ताह का वक्त दिया जाए।
अटॉर्नी जनरल ने भी मांगा वक्त
सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों पर जस्टिस पी.एस. नरसिम्मा और जस्टिस अतुल कुमार चंदोकर की खंडपीठ में सुनवाई होनी थी. इस मामले में कुछ दूसरे अधिवक्ताओं ने भी वक्त मांगा है. इस मामले में अटॉर्नी जनरल वेंकटरमनी ने भी वक्त मांगा. उन्होंने बताया कि वह इस मामले में रेस्पोंडेंट हैं. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा कि आप लोगों को तैयारी करके आना चाहिए था. अनारक्षित वर्ग की ओर से वकालत करने वाले एडवोकेट की बात मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्टूबर को अगली सुनवाई की तारीख तय की है।

जानिए हाईकोर्ट से मामला सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा?
कमलनाथ सरकार के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला कर लिया था. जैसे ही 27 प्रतिशत आरक्षण की बात सामने आई तो तुरंत आरक्षण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं लगना शुरू हो गईं. इस मामले में अब तक 75 से ज्यादा याचिकाएं लग चुकी हैं. ज्यादातर मामलों में याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के बाद मध्य प्रदेश में आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा हो रहा है. हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद यह सभी मामले फिलहाल सुप्रीम कोर्ट चले गए. हाईकोर्ट ने कुछ मामलों में 13 प्रतिशत पद होल्ड करके भर्ती प्रक्रिया जारी रखने को कहा. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है.
एडवोकेट रामेश्वर सिंह ने बताया कि ष्हाईकोर्ट से लगभग सभी 75 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर हुई हैं. इनमें से आज मात्र 11 याचिकाओं पर सुनवाई होनी थी. इनमें भी छत्तीसगढ़ के 2 मामले भी सुनवाई के लिए आए थे।
8 अक्टूबर को होगी मामले में सुनवाई
अब इस मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी. हालांकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं. लेकिन 27 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा, ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट को ही इस मामले में फैसला सुनाना है कि यह आरक्षण जारी रखा जाए या इसे वापस 14 प्रतिशत पर रोक दिया जाए।

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