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राष्ट्रपति के दोनों सदनों को संबोधित करने के दौरान विपक्ष के हंगामा करने से बाकी सत्र के हंगामेदार होने के आसार - Nand Kesari || Top News || Latest News

राष्ट्रपति के दोनों सदनों को संबोधित करने के दौरान विपक्ष के हंगामा करने से बाकी सत्र के हंगामेदार होने के आसार

नई दिल्ली । संसद का बजट सत्र 2026-27 बुधवार से शुरू हुआ. इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया. अभिभाषण करीब 45 मिनट तक चला, जिसमें सरकार की उपलब्धियों, विकसित भारत 2047 के रोडमैप और वैश्विक भूमिका पर जोर दिया गया. लेकिन जैसे ही राष्ट्रपति ने श्विकसित भारत-जी राम जीश् कानून का जिक्र किया, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।

इतना ही नहीं विपक्षी सांसद वापस लो-वापस लो के नारे लगाते हुए खड़े हो गए, जिससे सदन में शोरगुल मच गया. श्जी राम जी कानूनश् को लेकर राष्ट्रपति के अभिभाषण के बीच मचा ये हंगामा कहीं न कहीं संसदीय परम्परा के खिलाफ तो था ही साथ ही ये भी तय कर दिया कि बजट सत्र में भी विपक्ष का साथ मिलना सरकार के लिए मुश्किल ही साबित होगा.
बता दें कि यह कानून शीतकालीन सत्र में पारित हुआ था, जो मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह लेगा. नए कानून में ग्रामीण इलाकों में 100 दिनों की बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी का प्रावधान है. सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इससे महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, जो उनके अपमान के समान है. साथ ही, वित्तीय बोझ का हिस्सा अब राज्यों पर भी डाला जाएगा, जबकि मनरेगा में केंद्र पूरा खर्च उठाता था.
एक रिपोर्ट
संसद के बजट सत्र का पहला दिन जब राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है आमतौर पर दोनों सत्र को जब राष्ट्रपति संबोधित करतीं है संसदीय परिपाटी के मुताबिक विपक्ष हमेशा से राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान शांत रहता आया है मगर बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के नारेबाजी से सदन प्रभावित रहा. एनडीए सांसदों ने मेज थपथपाकर राष्ट्रपति का समर्थन किया. मगर विपक्ष इस बिल के खिलाफ नारे लगाते रहे और कुछ मिनटों बाद विपक्ष शांत हुआ, लेकिन हंगामा इतना तेज था कि दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित हुई।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में जिन मुख्य बातों का जिक्र किया गया उसमें श्ऑपरेशन सिंदूरश् में भारत की सैन्य ताकत के साथ ही आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की सफलता को भी दोनों सदनों को बताया. साथ ही राष्ट्रपति ने 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा, 2 करोड़ लखपति दीदी, मुद्रा योजना से 38 लाख करोड़ के फंड की भी बात अपने भाषण में मुख्य तौर पर रखी. इसके अलावा 60 हजार युवाओं को सेमीकंडक्टर ट्रेनिंग, 10 लाख को एआई स्किल्स,150 वंदे भारत ट्रेनें, स्वदेशी स्पेस स्टेशन की तैयारी, वैश्विक चुनौतियों में भारत की श्सेतुश् भूमिका और सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार मुक्त भारत और विकसित भारत की दिशा पर जोर दिया. मगर सवाल ये है कि जिस तरह से विपक्ष ने पहले ही मनरेगा, यानी वीबी-जी राम जी कानून, पर सरकार को घेरा उसे देखते हुए ये सत्र हंगामेदार होने की संभावना है।
देखा जाए तो विपक्ष के पास इस सत्र में कई मुद्दे हैं जिनमें मुख्य रूप से अमेरिकी टैरिफ, इकोनॉमी, एयर पॉल्यूशन, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है. ऑल पार्टी मीटिंग में भी विपक्ष ने इन कानूनों को वापस लेने की मांग की थी. जहां कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इसे मुख्य मुद्दा बनाया है।
वहीं दो चरणों में जिनमें 28 जनवरी-13 फरवरी और 9 मार्च-3 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र का काफी हंगामेदार होने की बात विपक्षी कर रहे हैं. खासकर गुरुवार को आर्थिक सर्वे 1 फरवरी को यूनियन बजट के दौरान भी विपक्ष के आक्रामक रहने की संभावना जताई जा रही है।
बजट सत्र में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जहां विपक्ष इस कानून और अन्य मुद्दों पर जोर देगा. यदि हंगामा जारी रहा तो महत्वपूर्ण विधेयकों पर बहस प्रभावित हो सकती है. सरकार इसे विकास और रोजगार के सुधार के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे ग्रामीण भारत के साथ अन्याय बता रहा है. ऐसे में जब कई राज्यों का चुनाव है और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अजीत पवार की प्लेन क्रैश में मृत्यु की घटना पर भी विपक्ष के तीखे सवाल सरकार को घेर सकते हैं।

नई दिल्ली । संसद का बजट सत्र 2026-27 बुधवार से शुरू हुआ. इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित किया. अभिभाषण करीब 45 मिनट तक चला, जिसमें सरकार की उपलब्धियों, विकसित भारत 2047 के रोडमैप और वैश्विक भूमिका पर जोर दिया गया. लेकिन जैसे ही राष्ट्रपति ने श्विकसित भारत-जी राम जीश् कानून का जिक्र किया, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया।

इतना ही नहीं विपक्षी सांसद वापस लो-वापस लो के नारे लगाते हुए खड़े हो गए, जिससे सदन में शोरगुल मच गया. श्जी राम जी कानूनश् को लेकर राष्ट्रपति के अभिभाषण के बीच मचा ये हंगामा कहीं न कहीं संसदीय परम्परा के खिलाफ तो था ही साथ ही ये भी तय कर दिया कि बजट सत्र में भी विपक्ष का साथ मिलना सरकार के लिए मुश्किल ही साबित होगा.
बता दें कि यह कानून शीतकालीन सत्र में पारित हुआ था, जो मनरेगा यानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह लेगा. नए कानून में ग्रामीण इलाकों में 100 दिनों की बजाय 125 दिनों की रोजगार गारंटी का प्रावधान है. सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इससे महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, जो उनके अपमान के समान है. साथ ही, वित्तीय बोझ का हिस्सा अब राज्यों पर भी डाला जाएगा, जबकि मनरेगा में केंद्र पूरा खर्च उठाता था.
एक रिपोर्ट
संसद के बजट सत्र का पहला दिन जब राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है आमतौर पर दोनों सत्र को जब राष्ट्रपति संबोधित करतीं है संसदीय परिपाटी के मुताबिक विपक्ष हमेशा से राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान शांत रहता आया है मगर बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के नारेबाजी से सदन प्रभावित रहा. एनडीए सांसदों ने मेज थपथपाकर राष्ट्रपति का समर्थन किया. मगर विपक्ष इस बिल के खिलाफ नारे लगाते रहे और कुछ मिनटों बाद विपक्ष शांत हुआ, लेकिन हंगामा इतना तेज था कि दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित हुई।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में जिन मुख्य बातों का जिक्र किया गया उसमें श्ऑपरेशन सिंदूरश् में भारत की सैन्य ताकत के साथ ही आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की सफलता को भी दोनों सदनों को बताया. साथ ही राष्ट्रपति ने 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा, 2 करोड़ लखपति दीदी, मुद्रा योजना से 38 लाख करोड़ के फंड की भी बात अपने भाषण में मुख्य तौर पर रखी. इसके अलावा 60 हजार युवाओं को सेमीकंडक्टर ट्रेनिंग, 10 लाख को एआई स्किल्स,150 वंदे भारत ट्रेनें, स्वदेशी स्पेस स्टेशन की तैयारी, वैश्विक चुनौतियों में भारत की श्सेतुश् भूमिका और सामाजिक न्याय, भ्रष्टाचार मुक्त भारत और विकसित भारत की दिशा पर जोर दिया. मगर सवाल ये है कि जिस तरह से विपक्ष ने पहले ही मनरेगा, यानी वीबी-जी राम जी कानून, पर सरकार को घेरा उसे देखते हुए ये सत्र हंगामेदार होने की संभावना है।
देखा जाए तो विपक्ष के पास इस सत्र में कई मुद्दे हैं जिनमें मुख्य रूप से अमेरिकी टैरिफ, इकोनॉमी, एयर पॉल्यूशन, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है. ऑल पार्टी मीटिंग में भी विपक्ष ने इन कानूनों को वापस लेने की मांग की थी. जहां कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इसे मुख्य मुद्दा बनाया है।
वहीं दो चरणों में जिनमें 28 जनवरी-13 फरवरी और 9 मार्च-3 अप्रैल तक चलने वाले इस सत्र का काफी हंगामेदार होने की बात विपक्षी कर रहे हैं. खासकर गुरुवार को आर्थिक सर्वे 1 फरवरी को यूनियन बजट के दौरान भी विपक्ष के आक्रामक रहने की संभावना जताई जा रही है।
बजट सत्र में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी, जहां विपक्ष इस कानून और अन्य मुद्दों पर जोर देगा. यदि हंगामा जारी रहा तो महत्वपूर्ण विधेयकों पर बहस प्रभावित हो सकती है. सरकार इसे विकास और रोजगार के सुधार के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे ग्रामीण भारत के साथ अन्याय बता रहा है. ऐसे में जब कई राज्यों का चुनाव है और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अजीत पवार की प्लेन क्रैश में मृत्यु की घटना पर भी विपक्ष के तीखे सवाल सरकार को घेर सकते हैं।

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