नई दिल्ली। गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा कि बिल को लेकर कुछ भ्रम फैलाए जा रहे हैं, जो कि ठीक नहीं है. गृह मंत्री ने कहा कि बिल पर बहस के दौरान विपक्षी दलों द्वारा यह धारणा बनाई जा रही है कि पूरी प्रक्रिया के बाद दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व आनुपातिक तरीके से कम हो जाएगा।
शाह ने कहा कि यह एक भ्रम है, जिसे जानबूझकर फैलाया जा रहा है कि ये तीनों विधेयक, संवैधानिक संशोधन विधेयक और परिसीमन तथा चुनाव प्रक्रियाओं में बदलाव से संबंधित दो कानून, लोकसभा में दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व को कम कर देंगे और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाएंगे।
गृह मंत्री ने आंकड़ा देकर दक्षिण भारत के सभी राज्यों की स्थिति के बारे में जानकारी दी. उन्होंने जो कहा, वो कुछ इस तरह है.
1. कर्नाटक के पास 28 सीटें हैं, जो सदन की 543 सीटों का 5.15 प्रतिशत है. विधेयक पारित होने के बाद, कर्नाटक के सांसदों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी और लोकसभा में उसका प्रतिशत 5.44 हो जाएगा. कर्नाटक को कोई नुकसान नहीं होगा.
2. आंध्र प्रदेश के पास 25 सीटें हैं, जो 4.60 प्रतिशत है. विधेयक पारित होने के बाद, सांसदों की संख्या 25 से बढ़कर 38 हो जाएगी, जो 4.65 प्रतिशत होगी।
3. तेलंगाना के पास 17 सीटें हैं, जो 3.13 प्रतिशत है. विधेयक पारित होने के बाद, सांसदों की संख्या 17 से बढ़कर 26 हो जाएगी, जो 3.18 प्रतिशत होगी।
4. तमिलनाडु में 49 सीटें हैं, जो 7.18 प्रतिशत हैं. विधेयक पारित होने के बाद सांसदों की संख्या 59 हो जाएगी और 816 सदस्यों वाले नए सदन में उनका प्रतिशत 7.23 प्रतिशत होगा. तमिलनाडु को भी कोई नुकसान नहीं होगा.
5. केरल में 20 सीटें हैं, जो 3.68 प्रतिशत हैं. विधेयक पारित होने के बाद सांसदों की संख्या 30 हो जाएगी और नए सदन में उनका प्रतिशत 3.67 प्रतिशत होगा.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि हम दक्षिण के लिए बनाए गए पूरे विवरण को एक साथ कर लें, तो 543 सीटों में से वर्तमान में 129 सांसद इस सदन में हैं, जो लगभग 23.76ः है, जबकि नए सदन में 195 सांसद होंगे और उनकी शक्ति 23.97ः होगी.
परिसीमन आयोग को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कुछ सवाल उठाए थे. इसका जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग का जिक्र हुआ था, जिसमें कहा गया था कि हम परिसीमन आयोग में अपने लोगों को नियुक्त करेंगे और वे ये सब करेंगे।शाह ने कहा कि मैं प्रियंका गांधी से कहना चाहता हूं कि हमने परिसीमन आयोग में कोई बदलाव नहीं किया है. हमने आपके परिसीमन आयोग अधिनियम को हूबहू लागू किया है. अगर आपने इसमें कोई छेड़छाड़ की है, तो मैं कह सकता हूं कि हम ऐसा नहीं करेंगे।
लोकसभा में महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा में कुछ विपक्षी सदस्यों की विभिन्न आशंकाओं और आपत्तियों को उठाया था।
गृह मंत्री ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर उन्हें भी डरने की जरूरत नहीं है, ‘‘हालांकि वह जीतेंगे नहीं, यह अलग बात है.’’उन्होंने कहा कि 130 करोड़ की आबादी को प्रभावित करने के आरोप लगाने वाले लोग हमारी शक्तियों का कुछ ज्यादा ही आकलन कर रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘लोकतंत्र में जनता तय करती है. राजनीतिक दल यह नहीं कर सकते. अगर कर पाते तो हम तो जीतते ही नहीं, क्योंकि आप सत्ता में बैठे थे.’’
शाह ने कहा, ‘‘इस देश का इतिहास है कि आपातकाल के बाद भी जनमत प्रभावित नहीं होता. जहां तक लोकतंत्र को खत्म करने की बात कही है तो मैं भाजपा कार्यकर्ता और सांसद होने के नाते कहता हूं कि किसी की भी ताकत नहीं है इस देश से लोकतंत्र को खत्म करने की. जिन्होंने आपातकाल में ऐसे प्रयास किये, लोगों ने उन्हें खत्म कर दिया था.’’
विधेयक में ये आंकड़े कहां से आए, कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल के इस सवाल पर शाह ने कहा, ‘‘इस बारे में मैं कल अपने जवाब में विस्तार से बता दूंगा, लेकिन वह सुनने के लिए आप बैठना, वाकआउट नहीं करना. इतनी सरलता से सारी बातें समझाऊंगा कि केजी के बच्चे को भी समझ में आ जाएं.’’ शाह ने अपना यह दावा भी दोहराया कि अगली जनगणना जातीय जनगणना होगी।
