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ग्वालियर में शुभारंभ से पहले ही निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का गर्डर गिरा - Nand Kesari || Top News || Latest News

ग्वालियर में शुभारंभ से पहले ही निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का गर्डर गिरा

खेड़ापति कॉलोनी के पास हादसा, एक मजदूर घायल
ग्वालियर। ग्वालियर में अभी एलिवेटेड रोड शुरू भी नहीं हुई है और निर्माण के दौरान ही उसका गार्डर गिर गया। निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का गर्डर गिरने से लोगों में दहशत है और उनका कहना है कि निर्माण के दौरान ही गार्डर गिर रहा है अगर यह रोड बनकर चालू हुई और ट्रेफिक का लोड बढ़ा तो क्या होगा। खेड़ापति कॉलोनी में खेड़ापति मंदिर के पास निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड का का एक हिस्सा गुरुवार दोपहर लगभग 4 बजे अचानक गिर गया। सीमेंट का यह गर्डर 35 फीट लंबा है। इस हादसे में एक मजदूर घायल हो हुआ है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद प्रशासन का अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। मामले की सूचना पर प्रदेश ऊर्जा मंत्री प्रघुम्न सिंह तोमर और कांग्रेस नेता सुनील शर्मा मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। कांग्रेस नेता सुनील शर्मा ने पीएनसी कंपनी के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के मुताबिक खेड़ापति कॉलोनी में खेड़ापति मंदिर के पास गुरूवार दोपहर को पुल के ऊपर 35 फीट का एक हिस्सा सेट किया जा रहा था। अचानक संतुलन बिगड़ने के कारण यह हिस्सा नाले में जा गिरा। घटना के समय जोरदार धमाका हुआ, जिसे इलाके के निवासियों ने भी सुना। यह एलिवेटेड रोड केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यह एलिवेटेड रोड आगरा की पीएनसी कंपनी द्वारा 1300 करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार जिस रास्ते पर यह हादसा हुआ, उसे काम चलने के कारण पहले ही बंद कर दिया गया था। यदि यह रास्ता खुला होता तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था। हादसे की सूचना पर मौके पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री प्रघुम्न सिंह तोमर का कहना है कि निश्चित रूप से घटना तो है और यह बड़ा हादसा हो सकता था। इसलिए मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य आएंगे उसके आधार पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सुनील शर्मा भी मौके पर पहुंचे और निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जहां यह हादसा हुआ है, वहां से लोग गुजरते रहते हैं और यह आम रास्ता है। भले ही रास्ता बंद था, लेकिन अगर रास्ता चालू होता तो यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था। यह प्रशासनिक लापरवाही है।

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