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देशभर के मेडिकल स्टोर्स पर लगे ताले, केमिस्ट्स ने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ खोला मोर्चा - Nand Kesari || Top News || Latest News

देशभर के मेडिकल स्टोर्स पर लगे ताले, केमिस्ट्स ने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ खोला मोर्चा

जबलपुर में दवा व्यापारियों की हड़ताल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित दवाइयां भी बेचे जाने का आरोप
जबलपुर। पूरे देश में बुधवार को दवाओं की दुकान बंद है. दवा का कारोबार करने वाले लोगों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दवाओं के बेचे जाने से मरीज के सामने खतरे खड़े हो रहे हैं और उनका कारोबार संकट में आ रहा है. सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जो सुविधा कोरोना वायरस की महामारी के दौरान दी थी, उसे बंद करनी चाहिए. जबलपुर में भी इसी मांग को लेकर दवा कारोबारियों ने प्रदर्शन किया और दवाओं की दुकान बंद रखी.
दवा की दुकानों पर लगे हैं ताले
जबलपुर में बुधवार सुबह से ही दवा बाजार पूरी तरह से बंद है. यहां के सिविक सेंटर और शास्त्री ब्रिज के पास दवा बाजार है. यहां सुबह से ही दुकान खुल जाती थी, लेकिन बुधवार को सभी दुकानों के शटर पर ताले लगे हुए हैं. यहां तक की जबलपुर के आम मेडिकल स्टोर भी नहीं खुले.
ऑनलाइन दवा बिक्री बंद कराने को लेकर हड़ताल
जबलपुर केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आजाद जैन का कहना है कि ष्हमने पहले ही इस बात की घोषणा कर दी थी कि 20 मई को पूरे देश में दवाई की कोई दुकान नहीं खुलेगी. ऑल इंडिया बॉडी ने इस हड़ताल को कॉल किया था. इसलिए हम आज अपनी दुकान नहीं खोलेंगे।
कोरोना काल में मिले थे ऑनलाइ दवा बेचने के लाइसेंस
आजाद जैन का कहना है कि ष्28 अगस्त 2018 में जब कोरोना काल शुरू हुआ था, तो सरकार ने ड्रग और कॉस्मेटिक एक्ट के नियमों को बदला था. इसमें 817 ए में एक नियम लाया गया था, जिसके तहत कुछ कंपनियों को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर दवाइयां बेचने का लाइसेंस दिया गया था. यह लाइसेंस महामारी के दौरान दिया गया था. अब इसकी जरूरत नहीं है, इसलिए ऑनलाइन तरीके से बेची जाने वाली दवाइयों की सुविधा बंद की जानी चाहिए।
प्रतिबंधित दवाइयां भी ऑनलाइन बेचे जाने का आरोप
आजाद जैन का आरोप है कि ऑनलाइन तरीके से दवाइयां बेची जा रही हैं, उनमें कई ऐसी दवाइयां भी हैं, जो प्रतिबंधित हैं. लेकिन वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. इसके साथ ही ऑनलाइन के जरिए, जो दवाइयां मंगाई जाती हैं, उसमें ग्राहक को यह पता नहीं होता कि यह दवा कब खानी है, कब नहीं खानी है और इसके साथ क्या परहेज लेना है. ऐसी स्थिति में मरिज मनमर्जी से दवा खा रहा है. इसकी वजह से लोग बीमार हो रहे हैं.
केमिस्ट के सामने रोजगार का संकट
आजाद जैन का कहना है कि ष्हमें यह हिदायत है कि हम बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाई नहीं दे सकते, लेकिन ऑनलाइन तरीके से बेची जाने वाली दवाइयों में डॉक्टर की एक ही पर्ची पर कई बार दवाइयां दी जा रही हैं, यह गलत है. पूरे देश में लगभग 12 लाख केमिस्ट हैं और ऑनलाइन की वजह से इन सभी के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

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