भोपाल । भारत सरकार के मंत्रियों के समूह (एमओयू) ने भोपाल गैस पीड़ितों के चिकित्सा, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय पुनर्वास के लिए 272.75 करोड़ स्वीकृत किए थे. यह धनराशि 75ः25 के अनुपात में मध्य प्रदेश सरकार को सौंपी गई. इसमें से 139 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च ही नहीं की गई है और जो राशि खर्च में दिखाई गई है, उसका भी अधिकांश हिस्सा गैस पीड़ितों को किसी वास्तविक लाभ में परिवर्तित नहीं हुआ. यह आरोप बुधवार को गैस पीड़ित संगठनों ने एक सामूहिक मीडिया स्टेटमेंट जारी कर लगाया है।
आर्थिक पुनर्वास के 94 प्रतिशत भुगतान में धोखाधड़ी का आरोप
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा की नसरीन बी ने आरोप लगाया कि ष्आर्थिक पुनर्वास की निधि भ्रष्टाचार का शिकार हो गई. साल 2011 से 2013 के बीच 22 प्रशिक्षण एजेंसियों को 18.13 करोड़ दिए गए ताकि वे गैस पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए 133 व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम चला सकें. आरटीआई दस्तावेजों और 380 कथित लाभार्थियों के साक्षात्कार से सामने आया कि लगभग 25 प्रतिशत लाभार्थी नाम फर्जी थे, आधे से अधिक नियुक्ति पत्र जाली थे, और केवल 6 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को ही उनका स्टाइपेंड मिला. लगभग 94 प्रतिशत भुगतान धोखाधड़ीपूर्ण था. विभाग ने लगभग पूरे 100 करोड़ रुपये इन निरर्थक प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर खर्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन भ्रष्टाचार उजागर होने के कारण योजना रोक दी गई।
अस्पतालों में 90 प्रतिशत विशेषज्ञों के पद खाली
भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने कहा कि ष्यूनियन कार्बाइड गैस से पीड़ित रोगियों को इलाज के लिए बने अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 90 प्रतिशत और सामान्य डॉक्टरों के 50 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हैं. ये आंकड़े भोपाल गैस पीड़ित अस्पतालों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटरिंग समिति की नवीनतम रिपोर्ट में हैं।
अस्पतालों में 90 प्रतिशत विशेषज्ञों के पद खाली
रचना ढींगरा ने आरोप लगाया कि ष्सामाजिक पुनर्वास की निधि का भी भारी दुरुपयोग हुआ है. साल 2012 में गैस प्रभावितों को योग चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए 3.63 करोड़ रुपये से 7 योग केंद्र बनाए गए. लेकिन न तो एक भी योग थेरेपिस्ट नियुक्त किया गया और न ही आज तक किसी केंद्र में कोई योग कराया गया. इन केंद्रों का इस्तेमाल अब विवाह स्थलों के रूप में हो रहा है।
जहां आईसीयू नहीं, वहां लगाई ऑक्सीजन लाइन
रचना ढींगरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि ष्गैस प्रभावितों और उनके बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए 33 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अधिकांश सुविधाएं आज भी निष्क्रिय पड़ी हैं. वर्ष 2021 में 3 गैस राहत अस्पतालों में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए गए, लेकिन सर्जन और एनेस्थेटिस्टों की कमी के कारण एक भी बड़ी सर्जरी नहीं हुई. सोनोग्राफी एवं टीएमटी मशीनों सहित कई आवश्यक डायग्नोस्टिक उपकरण खरीदे गए, परंतु उन्हें संचालित करने के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन नियुक्त नहीं किए गए. जिन अस्पतालों में आईसीयू तक नहीं हैं वहां ऑक्सीजन लाइनें लगाई गई हैं।
4 साल से विधवा पेंशन बंद, जांच की मांग
भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के बाल कृष्ण नामदेव का आरोप है कि ष्फंड में 5 हजार गैस पीड़ित विधवा महिलाओं को हर महीने पेंशन देने के लिए 30 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था. लेकिन बीते 4 साल से इन महिलाओं को पेंशन नहीं मिल रही है. वहीं 500 नई विधवाओं के नाम भी नहीं जोड़े गए. साल 2019 में बनाई गई विधवा कालोनी में न तो सड़क है और न ही सीवेज सिस्टम. जबकि वर्ष 2014 में सीवेज व्यवस्था सुधारने के लिए 5 करोड़ स्वीकृत किए गए थे. लेकिन 10 वर्ष बाद भी एक भी नाली काम नहीं कर रही है. बरसात के मौसम में सीवेज का पानी विधवाओं के घरों में घुस जाता है।
2019 में बनाई गई विधवा कालोनी में न तो सड़क है और न ही सीवेज सिस्टम
गैस पीड़ित संगठनों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि गैस राहत राज्य सलाहकार समिति की तुरंत बैठक बुलाई जाए. भ्रष्टाचार और धन के दुरुपयोग की जांच शुरू की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि शेष अप्रयुक्त राशि का उपयोग सभी हितधारकों से परामर्श कर सार्थक पुनर्वास कार्यक्रमों में की जाए।
भोपाल गैस पीड़ितों के 139 करोड़ रुपए का नहीं हुआ इस्तेमाल, पीड़ित संगठनों का बड़ा आरोप
