Warning: Undefined array key 0 in /home/webhutor/nandkesari.com/wp-content/plugins/contact-form-7/includes/file.php on line 268
सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाई, कोर्ट ने कहा, हो सकता है दुरुपयोग - Nand Kesari || Top News || Latest News

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाई, कोर्ट ने कहा, हो सकता है दुरुपयोग

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (न्ळब्) के विवादास्पद नियमों पर रोक लगा दी है. इन नियमों को लेकर छात्रों के बीच गुस्सा बढ़ता जा रहा था. इसमें ओबीसी, एससी और एसटी छात्रों के खिलाफ उत्पीड़न होने पर कार्रवाई की बात कही गई थी, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों को लेकर ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया गया था. इसके खिलाफ याचिका लगाई गई थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूजीसी के नियम अस्पष्ट हैं. यानि इस समय 2012 वाले नियम ही जारी रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की संयुक्त बेंच ने रेगुलेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किए हैं. सभी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन को भेदभाव की शिकायतों को देखने और इक्विटी को बढ़ावा देने के लिए इक्विटी कमेटी बनाने के लिए जरूरी नए रेगुलेशन 13 जनवरी को नोटिफाई किए गए थे.
सीजेआई ने उदाहरण देते हुए ये सवाल भी पूछा कि मान लीजिए दक्षिण भारत का छात्र उत्तर भारत के किसी संस्थान में दाखिला लेता है (या इसका उल्टा), और उसके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां होती हैं, पीड़ित और टिप्पणी करने वालों की जाति पहचान भी स्पष्ट नहीं है, तो क्या यूजीसी का यह प्रावधान उस स्थिति को संभाल पाएगा?
सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने कहा, “75 साल बाद, एक देश में, हमने जाति-रहित समाज बनाने के मामले में जो कुछ भी हासिल किया है. क्या हम पीछे जा रहे हैं? क्या होगा?” सीजेआई ने कहा, “एक और नियम, जो मुझे आपके उठाए जा रहे कदमों में मिल रहा है, आप अलग हॉस्टल की बात कर रहे हैं, भगवान के लिए प्लीज ऐसा न करें! हम हॉस्टल में रहे हैंय स्टूडेंट साथ रह रहे हैं. हमने इंटर-कास्ट मैरिज भी की हैं. हमें जाति-रहित समाज की ओर आगे बढ़ना चाहिए.”
बेंच ने कहा कि अगर वह दखल नहीं देती है तो इसका खतरनाक असर होगा, और कहा कि इससे समाज बंट जाएगा और इसका गंभीर असर भी होगा. जस्टिस बागची ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील की बात सही है कि अगर 2012 का रेगुलेशन ज्यादा बड़े पैमाने पर और सबको शामिल करने वाले भेदभाव की बात करता है, और रैगिंग के रूप में भेदभाव को भी जोड़ा.
जस्टिस बागची ने कहा, “एक बचाव या सुधार वाले कानून में वापसी क्यों होना चाहिए? नॉन-रिग्रेशन का सिद्धांत पर्यावरण कानून में विकसित हुआ है. यह उन कानूनों में भी शामिल है, जो सामाजिक न्याय और समानता की रक्षा करते हैं. हमें उस स्टेज पर नहीं जाना चाहिए जहां हम अलग-अलग स्कूलों में जाएं, जैसा कि यूनाइटेड स्टेट्स में अश्वेत बच्चों के साथ होता है… गोरे लड़के और लड़कियां दूसरे स्कूल जाते हैं. भारत की एकता एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में दिखनी चाहिए.”
सीजेआई ने कहा कि इस तरह की स्थिति का समाज में शरारती तत्व फायदा उठा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “नोटिस जारी करें, जिसका जवाब 19 मार्च को दिया जाएगा. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नोटिस स्वीकार किया है. चूंकि 2019 की याचिका में उठाए गए मुद्दों का भी संवैधानिकता की जांच करते समय असर पड़ेगा३ इसलिए इन याचिकाओं को उसी के साथ टैग किया जाए. इस बीच यूजीसी रेगुलेशन 2026 को रोक कर रखा जाए.”
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में इक्विटी को बढ़ावा देना) रेगुलेशन, 2026 में यह जरूरी किया गया था कि इन कमेटियों में अन्य पिछड़ा वर्ग,अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति ,विकलांग व्यक्ति और महिलाओं के सदस्य शामिल होने चाहिए. सामान्य वर्ग को लेकर कुछ भी नहीं कहा गया था।
नए रेगुलेशन यूजीसी (हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में इक्विटी को बढ़ावा देना) रेगुलेशन, 2012 की जगह पर बनाए गए थे. 2012 वाले नियम परामर्शी थे, जबकि 2026 वाले नए नियम अनिवार्य थे. नए नियमों के खिलाफ दाखिल की गई याचिकाओं में इस रेगुलेशन का विरोध इस आधार पर किया गया कि जाति के आधार पर भेदभाव को सख्ती से एससी, एसटी और ओबीसी के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव के रूप में बताया गया है।
इसमें कहा गया कि जाति के आधार पर भेदभाव के दायरे को सिर्फ एससी, एसटी और ओबीसी कैटेगरी तक सीमित करके, यूजीसी ने सामान्य या गैर-आरक्षित कैटेगरी के लोगों को इंस्टीट्यूशनल सुरक्षा और शिकायत निवारण से असल में मना कर दिया है, जिन्हें अपनी जाति की पहचान के आधार पर परेशानी या भेदभाव का भी सामना करना पड़ सकता है. इन रेगुलेशन के खिलाफ कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें स्टूडेंट ग्रुप और ऑर्गनाइजेशन ने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।
क्या है विवाद!
यूजीसी को लेकर नया नियम सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही बनाए गए थे. भेदभाव की शिकायतों की जांच और समता को बढ़ावा देने के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समता समिति गठित करने को अनिवार्य करने वाले नए नियम 13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के तहत इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य किया गया था. इसमें सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व पर कुछ भी नहीं कहा गया था।

याचिका में कहा गया कि नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को केवल एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव तक सीमित कर दिया गया है. इन नियमों के खिलाफ विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, जहां छात्र समूह और संगठन इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
यूजीसी के नए नियम क्या हैं?
हर कॉलेज में ईक्वल अपॉर्च्यूनिटी सेंटर यानी इ्रओसी बनेगा।
ईओसी पिछड़े और विंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से जुड़ी मदद देगा।
कमेट में एस, एसटी, ओबीसी, महिलाएं और दिव्यांग शामिल होंगे. इस कमेटी का कार्यकाल 2 साल होगा।
हर कॉलेज में समता समिति बनानी होगी, जिसके अध्यक्ष कॉलेज के प्रमुख होंगे।
कॉलेज में इक्वलिटी स्क्वाड भी बनेगा, जो भेदभाव पर नजर रखेगा।
भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में मीटिंग जरूरी होगी. 15 दिन में रिपोर्ट कॉलेज प्रमुख को देनी होगी।
कॉलेज प्रमुख को 7 दिन में आगे की कार्रवाई शुरू करनी होगी।
ईओसी हर 6 महीने में कॉलेज को रिपोर्ट देगा।
यूजीसी राष्ट्रीय निगरानी कमेटी बनाएगा. नियम तोड़ने पर कॉलेज की ग्रांट रोकी जा सकती है।
कॉलेज को जातीय भेदभाव पर हर साल यूजीसी को रिपोर्ट भेजनी होगी।
गंभीर मामलों में यूजीसी की मान्यता भी रद्द हो सकती है।
कॉलेज के डिग्री, ऑनलाइन और डिस्टेंस कोर्स पर रोक लग सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

hacklink satın al coinbar coinbar giriş grandpashabet grandpashabet giriş grandpashabet güncel giriş grandpashabet grandpashabet giriş grandpashabet giriş güncel alobet alobet giriş betcio betcio giriş betcio betcio giriş holiganbet giriş holiganbet jojobet jojobet giriş meritking meritking giriş meritking meritking giriş meritking giriş meritking jojobet güncel giriş best online casinos in new zealand holiganbet holiganbet giriş holiganbet güncel giriş holiganbet holiganbet giriş holiganbet güncel giriş betcio betcio giriş alobet alobet giriş atlasbet atlasbet giriş pashagaming pashagaming giriş pashagaming pashagaming giriş madridbet madridbet giriş kingroyal kingroyal giriş grandpashabet grandpashabet giriş grandpashabet güncel giriş holiganbet holiganbet giriş holiganbet güncel giriş atlasbet atlasbet giriş atlasbet güncel giriş jasminbet jasminbet giriş meritking meritking giriş meritking güncel giriş meritking meritking giriş meritking güncel giriş pashagaming pashagaming giriş pashagaming güncel giriş betcio betcio giriş betcio güncel giriş imajbet tlcasino esbet matbet sonbahis betpuan sekabet vdcasino mercurecasino casinomilyon casinoroyal grandpashabet pusulabet perabet perabet giriş perabet perabet giriş