छिन्दवाड़ा: मध्य प्रदेश में लगातार जागरुकता अभियान के बावजूद कुछ किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं. छिंदवाड़ा में भी लगातार प्रशासन किसानों को समझाइश दे रहा है कि खेतों में पराली ना जलाएं लेकिन इसके बाद भी किसान मानने को तैयार नहीं है. लिहाजा प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 14 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज कर कराया है.
जिला प्रशासन की अपील के बावजूद नियमों का उल्लंघन
कृषि उपसंचालक जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया, जिले में गेहूं कटाई का काम तेजी से चल रहा है, जिसके बाद खेत में बचे हुए डंठल नरवाई का प्रबंधन उचित रूप से करने छिंदवाड़ा कलेक्टर हरेन्द्र नारायण के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा प्रचार प्रसार किया जा रहा है. नरवाई जलाने से खेत में मित्र कीट नष्ट होते हैं, खेतों की उर्वरा शक्ति कम होती है और प्रदूषण भी होता है. इसलिए शासन द्वारा कृषकों के बीच नरवाई न जलाने हेतु जागरूकता फैलाई जा रही हैं. बावजूद इसके कई किसान नियमों को उल्लंघन कर रहे हैं।
14 किसानों पर मामला दर्ज
कृषि उपसंचालक जितेंद्र कुमार सिंह ने आगे कहा, श्श् प्रत्येक पंचायत में गठित टीम द्वारा चौपाल संगोष्ठी कर किसानों को नरवाई में आग न लगाने हेतू प्रेरित कर शपथ दिलाई जा रही है और मुनादी भी कराई जा रही है. साथ ही नरवाई जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई के संबंध में भी अवगत कराया जा रहा है. इसके बाद भी कई किसान मानने को तैयार नहीं हैं. अब तक जिले में 14 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा चुका है. विकासखंड अमरवाड़ा में 6, चौरई में 3, बिछुआ में 4 और परासिया में 1 किसान पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. इसके साथ विकासखंड बिछुआ व छिंदवाडा में 1-1 किसान पर जुर्माना किया जा चुका है.
सुपर सीडर और हैप्पी सीडर का इस्तेमाल कर रहे कई किसान
उपसंचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया, श्श् किसानों द्वारा नरवाई प्रबंधन के लिए स्ट्रॉ रीपर का उपयोग, सुपर सीडर-हैप्पी सीडर द्वारा खड़ी नरवाई में बोनी करना, डीकंपोजर का उपयोग किया जा रहा है. जिले में कृषि विभाग व राजस्व विभाग के संयुक्त दल द्वारा लगातार नरवाई जलने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है और नरवाई जलने की सूचना मिलने पर दल द्वारा मौके पर जंच कर कार्रवाई की जा रही है।
सैटेलाइट से 497 घटनाओं की जानकारी मिली
कृषि उपसंचालक ने बताया कि राजस्व विभाग के पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव रोजगार की टीम बनाई गई है, जो नरवाई जलाने की घटनाओं का पंचनामा बनाकर प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रहे हैं. जिले में अभी तक कुल 497 घटनाएं सेटेलाईट द्वारा प्राप्त हुई हैं. सुपरसीडर मशीन से जीरो टिलेज पद्धति अपनाकर बिना नरवाई जलाए सीधे खेतों में बोनी की जा रही है, जिसका फायदा किसानों को आर्थिक रूप से होने के साथ-साथ जमीन की उर्वरक क्षमता को भी मिलता है।
खेतों में जलाई पराली और पहुंच गई पुलिस, 14 किसानों को मनमानी करना पड़ा भारी
