ग्वालियर। नीट परीक्षा में पेपर लीक मामले को लेकर राहुल गांधी के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने पिछले पांच वर्षों में नीट पेपर लीक और संसदीय कमेटी के सुझाव को दरकिनार करने को लेकर प्रधानमंत्री से शिक्षा मंत्री पर कार्रवाई की मांग की है।
ग्वालियर पहुंचे पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में तेल और सोना-चाँदी की खरीद-फरोख्त को लेकर की गई अपील पर निशाना साधा. वहीं नीट परीक्षा पेपर लीक होने को लेकर सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि, इस प्रकार लगातार चौथी या पांचवी बार नीट का पेपर लीक हुआ है और लगभग 22 लाख छात्र-छात्राओं को एक बार फिर से नीट की परीक्षा देनी पड़ेगी।
भाजपा शासित राज्यों में नीट परीक्षा के व्यवसाय का लगाया
उन्होंने भाजपा शासित प्रदेशों पर आरोप लगाते हुए कहा, ष्आप देखेंगे कि भाजपा शासित राज्यों में लगातार इस बात की शिकायतें आ रही हैं. खुलेआम व्यवसाय, व्यापार होना इसका कारण है. सन 2017 में पेपर लीक हुआ, 2021, 2024 में हुआ फिर 2026 में लीक हुआ… 2025 में भी हुआ था. लेकिन उस बात को स्वीकार नहीं किया गया. लेकिन इस बार जो आरोपी है, पिछले साल उसके परिवार के लगभग पांच लोग मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पा चुके हैं. पूरे तरीके से पेपर लीक करके लाखों, करोड़ों रुपए कमाए जा रहे हैं।
नीट परीक्षा में पारदर्शिता लाने को दो बार दिए सुझाव, एनटीए ने नहीं माने
पूर्व सीएम ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी की नजरअंदाजी को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, संसद की स्टैंडिंग कमिटी जो कि उच्च शिक्षा के मंत्रालय को देखती है, उसका मैं अध्यक्ष हूं. और हमने दो प्रतिवेदन में जिससे नीट एग्जामिनेशन में पारदर्शिता आ सकती है, उसके बारे में सुझाव दिए. लेकिन इस बात का दुख है कि उसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जो संस्था नीट के परीक्षा आयोजित करती है, उसने स्वीकार तक नहीं किया. और जब पत्रकारों ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मंत्री से प्रश्न किया तो उन्होंने कहा कि नहीं, संसद की स्टैंडिंग कमेटी का कोई औचित्य नहीं है और उसमें विपक्ष के लोग भी रहते हैं।
संसद की स्टैंडिंग कमेटी में विपक्ष के लोग, इसलिए नहीं माने सुझाव
उन्होंने आगे कहा, माननीय सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों लोकतंत्र की बुनियाद हैं. और आपका यह कहना कि आप उसकी सिफारिशें इसलिए नहीं मानेंगे क्योंकि उसमें विपक्ष के लोग भी हैं. लेकिन यह भूल जाते हैं कि मेरी अध्यक्षता में जितनी भी रिपोर्टें हमने दी हैं, लगभग 29-20 रिपोर्टें दी हैं, जिसमें बहुमत भारतीय जनता पार्टी के सांसदों का है. लेकिन एक रिपोर्ट में भी डिसेंटिंग नोट नहीं है. हमने सर्वसम्मति से सारे प्रस्ताव, सारे सुझाव हमने दिए हैं।
इसलिए शिक्षा मंत्री का जो बयान और जो विचार है, उससे उन्होंने संसदीय स्टैंडिंग कमेटी का अपमान किया है. हम उनकी निंदा करते हैं और उनके इस्तीफे की मांग करते हैं. और अगर वे इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त कर देना चाहिए।
लगातार पांचवी बार लीक हुआ नीट का पेपर, शिक्षामंत्री को तत्काल बर्खास्त करें प्रधानमंत्री
