ग्वालियर । म. प्र. सरकार द्वारा राज्य के व्यवसाईयों से प्रोफेशनल टैक्स वसूल किए जाने के विरोध में एक बार पुनः म. प्र. चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री व वित्त, वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा सहित प्रदेश के समस्त चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स को पत्र प्रेषित कर, उपरोक्त कर की समाप्ति की माँग की गई क्योंकि कर विगत् काफी वर्षों से व्यवसाईयों के ऊपर देय है, जबकि व्यवसाई अन्य प्रकार के कई करों का भुगतान कर रहा है । इसलिए प्रोफेशनल टैक्स को तत्काल समाप्त किए जाने की पुरजोर माँग की गई है । साथ ही, प्रदेश के सभी प्रमुख चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स से तदर्थ आवश्यक पहल किए जाने का अनुरोध किया गया है ।
अध्यक्ष-डॉ. प्रवीण अग्रवाल, संयुक्त अध्यक्ष-हेमन्त गुप्ता, उपाध्यक्ष-डॉ. राकेश अग्रवाल, मानसेवी सचिव-दीपक अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव-पवन कुमार अग्रवाल एवं कोषाध्यक्ष-संदीप नारायण अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि व्यापारियों को जी.एस.टी., आयकर, वैट आदि सहित बहुत सारे करों का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से मध्यप्रदेश का व्यापारी अपने आपको कर के बोझ से दबा हुआ पा रहा है । व्यापारी पर अपने व्यापार एवं उद्योग को चलाने के लिए, इससे संबंधित जितने कर लागू होते हैं, उसका लेखा-जोखा रखना होता है और शासन को समय-समय पर कर चुकाना होता है । पदाधिकारियों ने कहा है कि प्रोफेशनल टैक्स छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तरांचल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ, गोवा, जम्मू-कश्मीर, अरूणाचल प्रदेश, केन्द्रशासित प्रदेश-अंडमान निकोबार द्वीप समूह, दादर-नागर हवेली, दमन-दीव में व्यापारियों के ऊपर लागू नहीं है । मध्यप्रदेश में बावजूद इसके प्रोफेशनल टैक्स, प्रदेश के व्यापारियों से लिया जा रहा है, जबकि भारत सरकार द्वारा निर्धारित जो श्रेणियाँ हैं, उसके अनुसार व्यापारी, आन्त्रप्रन्योर, उद्योगपति और चौथी श्रेणी, जिसमें एज्यूकेशन सेवा देने का कार्य करते हैं, उनको प्रोफेशनल टैक्स की श्रेणी में रखा गया है ।
एमपीसीसीआई द्वारा प्रेषित पत्र में उल्लेख किया गया है कि म. प्र. में ष्प्रोफेशनल टैक्सष् की कुल वसूली लगभग 350 करोड़ के आसपास है । इस राशि में व्यापारियों से वसूले गए कर की राश लगभग 51-52 करोड़ रुपये है । प्रदेश सरकार के स्तर पर राजस्व का यह आंकड़ा इतना बड़ा नहीं है कि सरकार के राजस्व को यह प्रभावित कर सके । इसलिए प्रदेश के व्यवसाईयों को यदि इससे मुक्ति दी जाती है, तब अवश्य ही प्रदेश के लाखों व्यापारी इससे सुखद अनुभव महसूस करेंगे और सरकार के प्रति विश्वास की भावना में निश्चित ही बढ़ोत्तरी होगी । प्रेषित पत्र में माँग की गई है कि अन्य प्रदेशों की भांति मध्यप्रदेश में भी व्यापारियों को ष्प्रोफेशनल टैक्सष् से मुक्त रखा जाए । आशा है आप प्रदेश के व्यवसाईयों की भावना का सम्मान करते हुए, शीघ्र ही तत्संबंध में निर्णय लेकर, कारोबारियों के हित में अवश्य ही घोषणा करेंगे ।
एमपीसीसीआई की मांग, म.प्र. में व्यवसाईयों को प्रोफेशनल टैक्स से मुक्त किया जाए
