पचमढ़ी। मध्य प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पचमढ़ी में मानसूनी पर्यटकों की संख्या बढ़ गई है. इसके साथ ही नए पर्यटकों का मिजाज भी बदल गया है. जो पर्यटक पहले पर्यटन स्थलों पर पहुंचकर प्रसिद्ध झरनों में नहाने का आनंद ले रहे थे, अब वह जगह-जगह पहाड़ों पर बहते हुए वाटरफॉल को कैमरे में कैद करने के लिए आ रहे हैं. इसके अलावा पचमढ़ी की कोहरे और घने बादलों में लिपटी वादियों का सुंदर दृश्य देखने पर्यटन स्थलों पर पहुंच रहे हैं. मानसूनी बारिश के साथ पचमढ़ी में चारों ओर हरियाली छा गई है.
मंगलवार को पचमढ़ी में जमकर हुई बारिश
पचमढ़ी के हरे-भरे जंगल, वादियों, ऊंचे पहाड़ों से गिरते प्राकृतिक झरने, तेजी से बहती छोटी पहाड़ी नदियां और पर्यटन स्थलों की सुंदरता मानसूनी पर्यटकों आकर्षित कर रही है. एक दिन पहले पचमढ़ी में कुछ घंटे के दौरान 3.48 इंच बारिश हुई. इस जोरदार बारिश के कारण पचमढ़ी के नदी नाले ओवरफ्लो हो गए. इस भारी बारिश के बीच भी बड़ी संख्या में पर्यटक पर्यटन स्थलों पर पहुंचे. टूरिज्म जिला प्रबंधक मनोज ठाकुर कहते हैं कि ष्गर्मी में देश के विभिन्न स्थानों से पर्यटक यहां के ठंडे वातावरण में राहत पाने के लिए आते हैं, अब मानसूनी पर्यटक पचमढ़ी की हरियाली, बारिश और पर्यटन स्थलों पर भ्रमण करने आ रहे हैं.ष्
प्रदेश का सबसे ज्यादा बारिश वाला स्थान
नर्मदापुरम में हिल स्टेशन पचमढ़ी मध्य प्रदेश में सबसे अधिक बारिश होने वाला स्थान है. यहां अन्य स्थानों की अपेक्षा तेज और अधिक बारिश होती है. पचमढ़ी में औसतन 1500 से 2000 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज होती है. पचमढ़ी में साल के 9 महीने बारिश होती है. मौसम रिपोर्ट के अनुसार मई से लेकर फरवरी तक हर महीने में औसतन 0.5 इंच बारिश दर्ज होती है. हालांकि जून से सितंबर तक सबसे अधिक बारिश होती है. जुलाई में बारिश का पीक सीजन रहता है।
पचमढ़ी के प्रसिद्ध वॉटरफॉल
मिनी कश्मीर के नाम से पहचान रखने वाले पचमढ़ी में ऐसे तो कई छोटे बड़े वॉटरफॉल हैं, लेकिन पर्यटक आमतौर पर प्रसिद्ध वॉटरफॉल जिसमें बी फॉल, अप्सरा विहार, रजत प्रपात, डचेस फॉल जाना पसंद करते हैं. पर्यटकों की सबसे अधिक भीड़ बी फॉल में देखने को मिलती है. यहां ऊपर मिनी झरना है, जहां पर्यटक आराम से ठंडे पानी में बैठकर नहाना पसंद करते हैं. यहां का ठंडा वातावरण पर्यटकों को हमेशा लुभाता रहा है।
इसके अलावा 400 मीटर नीचे खड़ी पहाड़ी उतरकर बीफॉल के मुख्य झरने में पहुंचा जाता है. यह झरना 152 फीट ऊंचाई से पत्थरों पर गिरता है. जिसमें नहाने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं. रजत( सिल्वर फॉल) प्रपात को दूर से देखा जाता है. यहां बहुत ही ऊंचाई से गिरता हुआ पानी चमकते हुए चांदी या दूध की धार जैसा लगता है. बारिश के समय मुख्य फॉल के आसपास और धूपगढ़, चौरागढ़ सहित अन्य स्थानों पर कई प्राकृतिक झरने फूट पड़ते हैं. जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं.
बारिश में रहना पड़ता है सतर्क
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के गाइड सतीश यादव बताते हैं कि ष्हिल स्टेशन पचमढ़ी में साल भर बहने वाले झरने और मानसून के समय निकलने वाले प्राकृतिक झरने पर्यटकों को लुभाते हैं. पिछले दो दोनों से तेज बारिश के धूप निकली और कई पर्यटन स्थलों पर कोहरा भी देखने को मिला है. मानसून के दौरान कई पर्यटक प्राकृतिक और मुख्य झरने को देखने के लिए आते हैं, लेकिन इस मौसम में यहां नहाना या उनके नजदीक जाना बहुत खतरनाक रहता है. पहाड़ी झरने बहुत तेजी से बहते हैं. यह बड़े-बड़े पत्थरों को भी बहा कर ले जाते हैं. पर्यटकों को हम बारिश के समय झरनों के आसपास जाने पर सतर्क कर देते हैं.
मानसून में पचमढ़ी का सौंदर्य अच्छा लगा
मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थल पचमढ़ी घूमने आई नर्मदापुरम की सरिता वैश ने बताया कि ष्हमें मानसून में पचमढ़ी भ्रमण करने की कई लोगों ने सलाह दी थी. इस मौसम में आए तो यहां का सौंदर्य बहुत अच्छा लगा. यहां हमने कई पर्यटन स्थल देखें हैं. बारिश के दौरान कई छोटे-छोटे झरने भी देखने को मिले।
एमपी: प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में बढ़ी पर्यटकों की संख्या,मानसूनी झरनों की धार ने बढ़ाई सुंदरता
