एमपी: आउटसोर्स भर्ती की नई गाइडलाइन, न्यूनतम योग्यता की शर्त में भी बदलाव

भोपाल । मध्य प्रदेश में अब कोई भी विभाग अपने स्तर पर आउटसोर्स पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं कर सकेगा. आउससोर्स के नाम पर कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए अब विभाग को वित्त विभाग से अनुमति लेनी होगी. वित्त विभाग ने इस संबंध में 2023 में जारी किए गए निर्देश को निरस्त करते हुए इसकी सूचना सभी विभागों, संभागायुक्त और कलेक्टरों को भेज दी है.
चतुर्थ श्रेणी के पद पर होती थी नियुक्तियां
सरकार ने विभागों द्वारा की जा रही लगातार भर्तियों को देखते हुए पूर्व में जारी आदेश को निरस्त कर दिया है. यह भी निर्णय लिया गया है कि कोई भी अलिपकीय पदों पर भर्ती 8 वीं के आधार पर नही होगी. प्रदेश के विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी के पदों की कमी बताते हुए आउटसोर्स पर भर्तियां की जा रही थीं, लेकिन अब वित्त विभाग ने इस पर रोक लगा दी है.
विभागों में पर्याप्त संख्या में भर्तियां होने का तर्क
वित्त विभाग ने 31 मार्च 2023 को सभी विभागों को निर्देश दिए थे कि चतुर्थ श्रेणी पदों की कमी को देखते हुए विभाग अपने स्तर पर आउटसोर्स के माध्यम से चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती कर सकेंगे. लेकिन अब वित्त विभाग ने इस निर्देश को निरस्त कर दिया है. इसके पीछे वजह बताई गई है कि अब विभागों में पर्याप्त संख्या में भर्तियां हुई हैं और इसलिए यह व्यवस्था अब जरूरी नहीं रह गई है. इसलिए इसे निरस्त किया गया है.
अब 8वीं कक्षा के आधार पर नहीं होगी भर्ती
राज्य शासन ने साफ कर दिया है कि अब अलिपकीय पदों पर भर्ती कक्षा आठवीं के आधार पर नहीं की जाएगी. इसके लिए तृतीय श्रेणी सेवा भर्ती नियम 1989 में संशोधन कर दिया गया है. इसमें प्रावधान करते हुए कक्षा आठवीं परीक्षा उत्तीर्ण के स्थान पर कम से कम कक्षा 10 वीं कक्षा उत्तीर्ण अनिवार्य किया गया है.
मनमाने तरीके से बनवा लेते थे मार्कशीट
अलिपकीय पदों पर कक्षा 8 वीं उत्तीर्ण के आधार पर पूर्व में भर्ती की प्रक्रिया के दौरान स्कूल संचालकों से पूर्व के सालों की साठगांठ कर 99 फीसदी तक की मार्कशीट बनवाकर पेश की गईं. इससे पहले तक कक्षा 8वीं परीक्षा बोर्ड न होने से स्कूल स्तर पर इसे बनवाया जाना आसान था. ऐसे कई मामले सामने आने के बाद अब इसमें बदलाव कर दिया गया है.पदों पर कक्षा 8 वीं उत्तीर्ण के आधार पर पूर्व में भर्ती की प्रक्रिया के दौरान स्कूल संचालकों से पूर्व के सालों की साठगांठ कर 99 फीसदी तक की मार्कशीट बनवाकर पेश की गईं. इससे पहले तक कक्षा 8वीं परीक्षा बोर्ड न होने से स्कूल स्तर पर इसे बनवाया जाना आसान था. ऐसे कई मामले सामने आने के बाद अब इसमें बदलाव कर दिया गया है।

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