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एमपी: बंजर जमीनों में लहलहाएंगी फसलें, ताप्ती-बेसिन मेगा योजना पर एमपी-महाराष्ट्र करेंगे काम - Nand Kesari || Top News || Latest News

एमपी: बंजर जमीनों में लहलहाएंगी फसलें, ताप्ती-बेसिन मेगा योजना पर एमपी-महाराष्ट्र करेंगे काम

 

सीएम मोहन यादव ने श्ताप्ती मेगा रिचार्ज योजनाश् व श्लोहघोघरी-तोतलाडोह जल परिवर्तन योजना के संबंध में बैठक की
भोपाल। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र मिलकर विश्व की सबसे बड़ी ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर काम शुरू करने जा रहे हैं. इसको लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई बैठकें हो चुकी हैं. अब दोनों राज्यों के बीच ताप्ती-बेसिन मेगा रीचार्ज योजना को लेकर अनुबंध किया जाएगा. इसको लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. सीएम ने कहा है कि ताप्ती मेगा रिचार्ज योजना के जरिए हम महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर ताप्ती नदी की तीन धाराएं बनाकर नदी जल के बूंद-बूंद का उपयोग सुनिश्चित कर कृषि भूमि का कोना-कोना सिंचित करेंगे.
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को मिलेगा 31.13 टीएमसी पानी
ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज योजना में कुल 31.13 टीएमसी पानी थाउजेंड मिलियन क्यूबिक फीट जल का उपयोग होगा. इसमें से 11.76 टीएमसी मध्य प्रदेश को और 19.36 टीएमसी जल महाराष्ट्र राज्य के हिस्से में आएगा. इस परियोजना में प्रस्तावित बांध एवं नहरों से मध्य प्रदेश की कुल 3 हजार 362 हेक्टेयर भूमि उपयोग में लाई जाएगी. इस परियोजना में खास बात यह है कि इससे कोई गांव प्रभावित नहीं होगा. जिससे पुनर्वास की भी आवश्यकता नहीं होगी.
बुरहानपुर और खंडवा को मिलेगा भरपूर पानी
सीएम मोहन ने बताया कि ष्ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना के पूरा होने पर मध्य प्रदेश के 1 लाख 23 हजार 82 हेक्टेयर भू-क्षेत्र और महाराष्ट्र के 2 लाख 34 हजार 706 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की स्थाई सुविधा उपलब्ध होगी. इस परियोजना से मध्य प्रदेश के बुरहानपुर व खंडवा नेपानगर, खकनार खालवा की कुल चार तहसील लाभांवित होंगी. इसी प्रकार कन्हान उपकछार में जल उपयोगिता के लिए मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तावित छिंदवाड़ा कॉम्पलेक्स बहुउद्देशीय परियोजना के माध्यम से महाराष्ट्र के नागपुर शहर को भी पानी मिलेगा. हमारे छिंदवाड़ा जिले के कृषि क्षेत्र में भी पर्याप्त जल उपलब्ध होगा।
250 किलोमीटर का भूमिगत तालाब बनेगा
इस योजना के अंतर्गत पूर्व में पारंपरिक भंडारण के लिए 66 टीएमसी क्षमता का जल भराव बांध प्रस्तावित किया गया था. जिससे 17 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि प्रभावित हो रही थी. साथ ही वन भूमि एवं बाघ अभ्यारण की भूमि भी शामिल थी. इसके अलावा 73 गांव की लगभग 14 हजार जनसंख्या भी प्रभावित हो रही थी. जिसके कारण योजना में बदलाव किया गया है. अब पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भूजल पुनर्भरण योजना द्वारा जल भंडारण प्रस्तावित किया गया है. इसके तहत सतपुड़ा पर्वत और विंध्य मध्य हाइड्रोलाजिकल फाल्ट से सतपुड़ा रेंज में 250 किलोमीटर का विशाल भूमिगत तालाब बनाया जाएगा. इसमें इतना पानी होगा कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में 100 वर्षों तक सिंचाई की जा सके.
ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना में 4 जल संरचनाएं प्रस्तावित
इस परियोजना में खरिया गुटीघाट बांध स्थल पर लो डायवर्सन वियर बनाया जाएगा. यह वियर दोनों राज्यों की सीमा पर मध्य प्रदेश की खंडवा जिले की खालवा तहसील एवं महाराष्ट्र की अमरावती तहसील में प्रस्तावित है. इसकी जल भराव क्षमता 8.31 टीएमसी प्रस्तावित है. वहीं दाई तट नहर को पहले चरण में प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर के दाएं तट से 221 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जो मध्य प्रदेश में 110 किलोमीटर बनेगी.
इस नहर से मध्य प्रदेश के 55 हजार 89 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी. वहीं दूसरे चरण में खरिया गुटीघाट वियर के बाएं तट से 135.64 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जो मध्य प्रदेश में 100.42 किलोमीटर बनेगी. इस नहर से मध्य प्रदेश के 44 हजार 993 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है. इसके साथ ही बाईं तट नहर के दूसरे चरण में यह नहर बाईं तट नहर प्रथम चरण के आर डी 90.89 किमी से 14 किलोमीटर लंबी टनल के माध्यम से प्रवाहित होगी. इसकी लंबाई 123.97 किलोमीटर होगी, जिससे केवल महाराष्ट्र के 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है.
छिंदवाड़ा कॉम्प्लेक्स बहुउद्देशीय परियोजना
योजना की प्रशासकीय स्वीकृति राशि रुपए 5470.95 करोड़ की वर्ष 2019 में जारी की गई. इसके अंतर्गत संगम एक, संगम दो, रामघाट एवं पांढुर्णा बांध का निर्माण कार्य होगा. इसका सिंचाई क्षेत्र 1 लाख 90 हजार 500 हेक्टेयर होगा. इसमें लाभान्वित विकासखंड में जुन्नारदेव, उमरेठ, छिंदवाड़ा, मोहखेड, पांढुर्णा, सोंसर एवं बिछुआ शामिल है. इससे औद्योगिक क्षेत्र के लिए 20 मिलियन घन मीटर जल आरक्षित होगा. वहीं इससे जल विद्युत उत्पादन 30 मेगावाट होगा।

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