भोपाल। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तथाकथित एक्टिविस्ट की तुलना कॉकरोच से किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सीनियर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बयान की निंदा करते हुए कहा है कि यह बयान आखिर क्या मानसिकता दिखाता है, यह वही मानसिकता है, जो फांसीवादी सरकार की है. राजधानी भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए सीनियर वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि धीरे-धीरे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में ज्यादातर ऐसे जज बैठ गए हैं, जो या तो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा से प्रभावित हैं या अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत करते हैं या कानून के राज में विश्वास नहीं करते और जिनकी खुद की फॉसिस्ट विचारधारा है.
प्रशांत भूषण बोले-सुप्रीम कोर्ट सरकार के दवाब में
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशांत भूषण ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ष्बीजेपी ने न्यायपालिका को भी अपने कब्जे में ले लिया है. इसके लिए एक तरह से दबाव होता है कि यदि हमारा काम करोगे तो उन्हें किसी राज्य में गवर्नर बना देंगे या फिर किसी आयोग का अध्यक्ष बना देंगे. वैसे भी जब देश में इस तरह की सरकार होती है तो जज भी डर जाते हैं. सरकार निष्पक्ष रूप से जजों का चयन नहीं होने दे रही.
यूसीसी पर प्रशांत भूषण का बयान
कानून कहता है कि सुप्रीम कोर्ट के पांच सीनियर जज का कॉलेजियम जज का नाम तय कर सरकार को भेजेगा, यदि सरकार को नाम पसंद नहीं है, तो सरकार एक बार ही उसको लेकर मना कर सकती है, लेकिन इसके बाद भी अंतिम निर्णय कॉलेजियम का होता है. अब केन्द्र सरकार कॉलेजियम द्वारा भेजे जाने वाला नाम पसंद न होने पर उस पत्र का कोई जवाब ही नहीं देती. सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामले में कानून मंत्री को कंटेंम्ट भेजना चाहिए, लेकिन ऐसा करने की हिम्मत सुप्रीम कोर्ट में नहीं है.
सड़क पर उतरने से ही बदलेगी व्यवस्था
प्रशांत भूषण ने कहा कि देश की व्यवस्था बदलनी है तो जनता को सड़क पर उतना होगा. देश में अभी बेरोजगारी, अमेरिका ट्रेड जैसे कई मुद्दे हैं, जिसके लिए बड़े जन आंदोलन की जरूरत है. जिस दिन इन मुद्दों को लेकर जनता सड़क पर उतर गई, व्यवस्था अपने आप बदल जाएगी. वहीं यूसीसी यानि यूनिफॉर्म सिविल कोड (न्ब्ब्) को लेकर उन्होंने कहा कि इसमें कोई बुराई नहीं है. बस वो एक लिबरल सिविल कोड हो, एक हिंदू सिविल कोड न बन जाए. यूनिफॉर्म सभी के लिए होना चाहिए, लेकिन वो सबसे लिबरल सिविल कोड होना चाहिए. मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, बस यह नहीं चाहता कि एक दकियानूसी सिविल कोड बने.ष्
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद ने कहा कि ष्हम जिस वक्त में हैं, उसमें हमें अपनी भूमिका को समझना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार तीन तलाक कानून लेकर आई, लेकिन ऊपर से यह देखने पर बहुत प्रगतिशील लगता है, लेकिन इस कानून के जरिए मुस्लिम पुरुषों की क्रूर छवि दिखाने की कोशिश की गई. इसी तरह का धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर बनाया गया कानून लव जिहाद कानून भी है. बहुसंख्यकों के बीच अल्पसंख्यकों की एक विलेन की इमेज बनाई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में ज्यादातर जज आरएसएस की विचार धारा वाले, भोपाल में यूसीसी पर भी बोले प्रशांत भूषण
