भोपाल। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न हो पाने की गूंज अब मध्य प्रदेश विधानसभा में सुनाई देगी. मध्य प्रदेश सरकार ने अब इस पर चर्चा के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा का 27 अप्रैल को एक दिन का विशेष सत्र बुलाया है. राज्य शासन ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है. विधानसभा के इस विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण पर चर्चा होगी. सरकार महिला आरक्षण के समर्थन में संकल्प पारित करेगी. हालांकि सत्र को लेकर कुछ नियम भी बनाए गए हैं, इन नियमों का सभी विधानसभा सदस्यों को पालन करना होगा।
विधायकों को करना होगा नियमों का पालन
विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी करने के साथ ही विशेष सत्र के लिए कुछ नियम भी बनाए गए हैं. इनका पालन सभी विधानसभा सदस्यों को करना होगा. इसके लिए विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 251 का हवाला दिया गया है. बुलाए गए सत्र के विषय पर चर्चा के दौरान विधायक ऐसे किसी तथ्य या विषय का उल्लेख नहीं करेंगे, जिस पर न्यायिक मामला कोर्ट में लंबित हो।
किसी भी विधानसभा सदस्य द्वारा चर्चा के दौरान दूसरे विधायक पर व्यक्तिगत दोषारोपण नहीं किया जाएगा. संसद या किसी राज्य विधान मंडल की कार्यवाही के संचालन के संबंध में आपत्तिजनक शब्दावली का उपयोग नहीं किया जाएगा. सभा के किसी भी निर्णय पर उसे रद्द करने के प्रस्ताव को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार के आरोप नहीं लगाए जाएंगे. चर्चा के दौरान राजद्रोह या दूसरे मानहानिकारक शब्दों का उपयोग सदस्य नहीं कर सकेंगे।
निंदा प्रस्ताव लेकर आएगी सरकार
यह पहला मौका होगा जब संसद में अटके किसी बिल पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है. इस सत्र के जरिए राजनीतिक और विधायी प्रतिक्रिया की जाएगी. लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित न हो पाने के विरोध में बीजेपी ने सोमवार को भोपाल में आक्रोश रैली निकाली थी. बीजेपी अब इस मुद्दे को जिला और ग्राम पंचायत तक ले जाने के अलावा इस पर विधानसभा बुला रही है।
आक्रोश रैली को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा था कि इसको लेकर विधानसभा का एक दिवसीय सत्र बुलाया जाएगा. प्रदेश के सभी संभागों और जिलों में प्रदर्शन रैलियां की जाएगी और पंचायत और नगरीय निकाय स्तर पर भी प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
एमपी: विधानसभा में गूंजेगा नारी शक्ति वंदन, 27 अप्रैल को बुलाया विशेष सत्र, विधायकों के लिए नियम जारी
